G-INews, KANPUR : यूके सरकार ने अपनी नई ‘इंटरनेशनल एजुकेशन स्ट्रैटेजी’ (जनवरी 2026) के जरिए वैश्विक शिक्षा बाजार में एक बड़ी हलचल पैदा कर दी है। इस योजना का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ब्रिटेन का ध्यान केवल छात्रों को यूके बुलाने पर नहीं, बल्कि अपनी शिक्षा को दुनिया के कोने-कोने तक ले जाने पर है।यहाँ इस नई रणनीति से जुड़ी विस्तृत खबर और मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
ब्रिटिश सरकार ने अपनी शिक्षा प्रणाली को दुनिया का सबसे बड़ा ‘निर्यात उत्पाद’ बनाने के लिए £40 बिलियन (लगभग ₹4.4 लाख करोड़) का सालाना लक्ष्य निर्धारित किया है। यूके की एजुकेशन सेक्रेटरी ब्रिजेट फिलिपसन ने स्पष्ट किया है कि यह रणनीति न केवल ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर लाखों छात्रों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को सुलभ बनाएगी।
प्रमुख बदलाव: छात्र जाएंगे नहीं, अब कैंपस आएंगे भारत
ब्रिटेन की पुरानी नीति (2019) में लक्ष्य छात्रों की संख्या बढ़ाना था, जिसे समय से पहले ही हासिल कर लिया गया। अब नई नीति के तहत:विदेशी कैंपस पर जोर दिया जा रहा है। यूके की यूनिवर्सिटीज को विदेशों में अपने ‘हब’ या कैंपस खोलने के लिए सरकार पूरा समर्थन देगी।
भारत पर विशेष फोकस: भारत उन 5 प्रमुख देशों में शामिल है जहाँ यूके अपनी जड़ें मजबूत करना चाहता है। हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन का गुरुग्राम (भारत) में कैंपस खुलना इसी कड़ी का हिस्सा है।कोई निश्चित छात्र संख्या नहीं: सरकार ने अब यूके आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या के लिए कोई ‘टारगेट’ नहीं रखा है, बल्कि ध्यान ‘क्वालिटी एजुकेशन एक्सपोर्ट’ पर है।
ऑटोमोटिव सेक्टर से भी बड़ी है शिक्षा की ताकत
यूके के लिए शिक्षा अब केवल एक सामाजिक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक पावरफुल इंडस्ट्री है। वर्तमान में शिक्षा से होने वाली £32.3 बिलियन की कमाई ब्रिटेन के प्रसिद्ध ऑटोमोटिव (कार निर्माण) और फूड-ड्रिंक इंडस्ट्री से भी अधिक है।भारतीय छात्रों के लिए क्या बदलेगा?घर बैठे डिग्री: अब भारतीय छात्रों को यूके की डिग्री के लिए लंदन जाने की मजबूरी नहीं होगी। वे भारत में स्थित ब्रिटिश कैंपस से वही वर्ल्ड-क्लास एजुकेशन ले सकेंगे।सस्ता विकल्प: विदेश में रहने और यात्रा का खर्च बचने से ब्रिटिश शिक्षा अधिक किफायती हो जाएगी।हाइब्रिड लर्निंग: डिजिटल लर्निंग और एआई (AI) आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।
कठोर नियम और सुरक्षा
हालांकि यूके विदेशी कैंपस को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन यूके जाकर पढ़ने वाले छात्रों के लिए वीजा नियमों और अनुपालन (Compliance) को और सख्त कर दिया गया है। यूनिवर्सिटीज को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि वे केवल गंभीर और योग्य छात्रों को ही बुलाएं, वरना उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।






