सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य पाने को नीति आयोग ने तैयार किया 10-वर्षीय रोडमैप, युवा उद्यमियों, इंजीनियरिंग छात्रों और स्टार्टअप्स के लिए खुलेंगे नए अवसर

G-INews, KANPUR : भारत को वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को सबसे महत्वपूर्ण आधार मानते हुए नीति आयोग ने दीर्घकालिक रणनीति पर जोर दिया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने कहा कि आज भारत के सामने सबसे बड़ा खतरा ऐसी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता है जिन्हें दूसरे देश नियंत्रित करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 21वीं सदी में किसी भी राष्ट्र की वास्तविक संप्रभुता उसकी तकनीकी और औद्योगिक अवसंरचना से तय होगी तथा सेमीकंडक्टर नेतृत्व उसी नींव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि niti.gov.in⁠� द्वारा तैयार किया जा रहा रोडमैप भारत को स्पष्ट लक्ष्य और उन्हें प्राप्त करने का व्यावहारिक मार्ग प्रदान करेगा। यह पहल देश को केवल उपभोक्ता बाजार से आगे बढ़ाकर वैश्विक तकनीकी निर्माण और नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

नीति आयोग की प्रतिष्ठित फेलो देबजानी घोष ने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग त्वरित लाभ वाला क्षेत्र नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक उद्योग है। वर्ष 2035 तक दुनिया में कौन-सी तकनीक निर्णायक होगी, इसकी तैयारी अभी से करनी होगी। उन्होंने कहा कि भारत को केवल मौजूदा मांग पूरी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, रिसर्च एवं डेवलपमेंट, प्रतिभा निर्माण और संपूर्ण टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में स्थायी नेतृत्व हासिल करने की दिशा में कार्य करना होगा।

छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह क्षेत्र

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दशक में भारत में चिप डिजाइन, एम्बेडेड सिस्टम, एआई हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन से जुड़े लाखों रोजगार सृजित हो सकते हैं। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, फिजिक्स और मैटेरियल साइंस के छात्रों के लिए यह क्षेत्र तेजी से उभरते करियर विकल्पों में शामिल हो रहा है। सेमीकंडक्टर उद्योग में केवल बड़े कारखानों की ही जरूरत नहीं होती, बल्कि डिजाइन सॉफ्टवेयर, टेस्टिंग, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर तकनीक, ईवी कंपोनेंट्स, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों से जुड़े स्टार्टअप्स की भी बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में युवा उद्यमियों के लिए भी यह क्षेत्र विशाल अवसर लेकर आ रहा है।

स्टार्टअप और एमएसएमई को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत उपस्थिति बनाता है तो इससे हजारों एमएसएमई इकाइयों को भी बढ़ावा मिलेगा। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, मशीनिंग, क्लीनरूम उपकरण, केमिकल सप्लाई, पैकेजिंग और टेस्टिंग जैसे क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की मांग तेजी से बढ़ सकती है। सरकार पहले ही इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, चिप निर्माण और डिस्प्ले फैब्रिकेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। अब नीति आयोग का यह 10-वर्षीय रोडमैप उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के बीच समन्वित रणनीति तैयार करेगा।

‘फ्रंटियर टेक हब’ क्या करेगा

niti.gov.in⁠� के अंतर्गत स्थापित ‘फ्रंटियर टेक हब’ विकसित भारत के लिए एक सक्रिय रणनीतिक मंच के रूप में कार्य करेगा। इसका उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों के वैश्विक बदलावों का पूर्वानुमान लगाना और भारत को उनके लिए तैयार करना है। इस पहल में सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के 100 से अधिक विशेषज्ञ सहयोग कर रहे हैं। हब का फोकस केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होगा, बल्कि सामाजिक प्रभाव, तकनीकी क्षमता निर्माण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य होगा।विशेषज्ञों का कहना है कि जिस प्रकार पिछले दो दशकों में सॉफ्टवेयर क्षेत्र ने भारत की वैश्विक पहचान बनाई, उसी प्रकार आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर और डीप-टेक सेक्टर भारत की नई तकनीकी शक्ति बन सकते हैं।

अशोक लाहिड़ी का बयान

“भारत के सामने आज सबसे बड़ा खतरा दूसरों द्वारा नियंत्रित प्रौद्योगिकी पर निर्भरता है। इस सदी में संप्रभुता की शुरुआत बुनियादी अवसंरचना से होगी, और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नेतृत्व उस नींव का हिस्सा है। नीति फ्रंटियर टेक हब का रोडमैप अत्‍यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के लिए स्पष्ट लक्ष्य और उसकी प्राप्ति का व्यावहारिक मार्ग निर्धारित करता है।”

देबजानी घोष का बयान

“सेमीकंडक्टर एक दीर्घकालिक उद्योग है। वर्ष 2035 में इस दिशा में नेतृत्व को परिभाषित करने वाली क्षमताओं का पूर्वानुमान, योजना और निर्माण आज ही करना होगा। इसलिए यह भविष्‍य योजना केवल मौजूदा मांग पूरी करने तक ही सीमित नहीं यह इस बात की पहचान करने हेतु अहम है प्रौद्योगिकी उत्‍कृष्‍टता किस दिशा में बढ़ रही है और भारत किन क्षेत्रों में स्थायी अग्रणी स्थिति हासिल कर सकता है। इस पर सोच-समझकर निर्णय लेना है।”

“हमारा ध्यान एक व्यावहारिक दस-वर्षीय मार्ग तैयार करने पर रहा है जो भारत को भागीदारी से आगे बढ़ाकर रणनीतिक गहराई हासिल कराने में सहायक हो और डिजाइन, उन्नत पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, प्रतिभा, अनुसंधान एवं विकास और पारिस्थितिकी तंत्र की तैयारी के क्षेत्र में कुशलता प्रदान करे।”

“अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समय का अत्‍याधिक महत्व है। जो देश पहले योजना बनाते हैं, इस दिशा में लगातार प्रयासरत रहते हैं और धैर्यपूर्वक क्षमताएं विकसित करते हैं, वही अग्रणी बनते हैं।”

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