NEET-UG 2026 विवाद के बाद JEE और NEET के लिए साझा परीक्षा प्रणाली पर मंथन शुरू


राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा सुधार : भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव

G-INews, New Delhi : NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देश की परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में बड़े सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए एक साझा राष्ट्रीय परीक्षा ढांचा तैयार करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसे भारत की प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।


हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा की तैयारियों का जायजा लिया। डॉ. राधाकृष्णन उस उच्च स्तरीय संचालन समिति के अध्यक्ष भी हैं, जिसका गठन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़ी सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए किया गया है।
बैठक में उच्च शिक्षा सचिव, एनटीए के महानिदेशक, शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने, निगरानी तंत्र को बेहतर करने और परीक्षा संचालन को पारदर्शी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ राधाकृष्णन के साथ मौजूद NTA के अधिकारी। फोटो -पीआइबी


एनटीए के महानिदेशक ने समिति को बताया कि प्रश्नपत्र सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और परीक्षा संचालन में कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं। साथ ही मौजूदा निगरानी तंत्र का व्यापक मूल्यांकन भी किया जा रहा है।


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन इसके साथ-साथ देशभर के परीक्षा केंद्रों पर छात्रों के लिए बेहतर सुविधाएं और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।


गौरतलब है कि NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून 2026 को देश के 550 शहरों में 5400 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जानी प्रस्तावित है।


क्या है प्रस्तावित राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा सुधार?


संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति और विशेषज्ञ समूहों के सामने प्रस्तुत सुझावों के अनुसार सरकार निम्न बिंदुओं पर विचार कर रही है:


इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश के लिए एकीकृत राष्ट्रीय परीक्षा ढांचा


सभी छात्रों के लिए सामान्य एप्टीट्यूड और साइंस सेक्शन।
विषय आधारित अलग-अलग सेक्शन:
इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के लिए गणित।
मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए बायोलॉजी।
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के बीच बेहतर समन्वय और मानकीकरण।
यह प्रस्ताव डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के बाद चर्चा में आया है।


प्रमुख सुधार जिन पर चल रही चर्चा

  1. साझा प्रवेश परीक्षा प्रणाली
    सरकार का मानना है कि एकीकृत परीक्षा ढांचा:
    छात्रों का दबाव कम करेगा,
    कई परीक्षाओं की तैयारी की जरूरत घटाएगा,
    और प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाएगा।
  2. स्ट्रीम आधारित अलग सेक्शन
    हालांकि परीक्षा ढांचा साझा हो सकता है, लेकिन:
    PCM छात्र इंजीनियरिंग सेक्शन देंगे।
    PCB छात्र मेडिकल सेक्शन देंगे।
    इससे दोनों क्षेत्रों की विशेषज्ञता बनी रहेगी।
  3. सख्त पात्रता नियम
    समिति ने:
    प्रयासों की संख्या सीमित करने,
    और NEET के लिए आयु सीमा तय करने जैसे सुझावों पर भी चर्चा की है।
  4. परीक्षा सुरक्षा में बड़े बदलाव
    पेपर लीक और गड़बड़ियों को रोकने के लिए:
    NTA की तीसरी एजेंसियों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
    डिजिटल निगरानी बढ़ाई जाएगी।
    कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं (CBT) की दिशा में धीरे-धीरे बढ़ने पर विचार किया जा रहा है।
    यह बहस क्यों महत्वपूर्ण है?
    भारत में हर वर्ष लाखों छात्र राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होते हैं। केवल NEET-UG 2026 में ही 22 लाख से अधिक छात्रों ने आवेदन किया था।
    ऐसे में यदि परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा पर सवाल उठते हैं तो इसका सीधा असर:
    छात्रों के आत्मविश्वास,
    मानसिक स्वास्थ्य,
    और शिक्षा व्यवस्था में जनता के भरोसे पर पड़ता है।
    यह बहस सिर्फ परीक्षा सुधार की नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की भी है।
    संभावित फायदे
    कई परीक्षाओं की तैयारी का दबाव कम होगा।
    परिवारों पर आर्थिक बोझ घटेगा।
    राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मानकीकरण संभव होगा।
    प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकेगी।
    चुनौतियां भी कम नहीं
    विशेषज्ञों के अनुसार कुछ अहम चुनौतियां भी सामने हैं:
    JEE और NEET की तैयारी का तरीका अलग है।
    ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल ढांचे की कमी।
    क्षेत्रीय भाषाओं में समान अवसर सुनिश्चित करना।
    दोनों स्ट्रीम के छात्रों के लिए निष्पक्ष मूल्यांकन।
    शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल
    इस बहस के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न उभरता है:
    “क्या हम छात्रों को सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए तैयार कर रहे हैं, या उन्हें बेहतर, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए शिक्षित कर रहे हैं?”
    विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की शिक्षा व्यवस्था केवल रैंक और चयन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसमें:
    वैचारिक समझ,
    तार्किक सोच,
    भावनात्मक मजबूती,
    और नैतिक शिक्षा को भी महत्व मिलना चाहिए।
    निष्कर्ष
    राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा सुधार 2026 भारत की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। चाहे सरकार JEE और NEET के लिए साझा परीक्षा लागू करे या आंशिक सुधार लाए, लेकिन यह स्पष्ट है कि देश अब परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की ओर बढ़ रहा है।
    यह केवल परीक्षा सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, भरोसेमंद और छात्र-केंद्रित बनाने का अवसर भी है।

Related Posts

सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य पाने को नीति आयोग ने तैयार किया 10-वर्षीय रोडमैप, युवा उद्यमियों, इंजीनियरिंग छात्रों और स्टार्टअप्स के लिए खुलेंगे नए अवसर

G-INews, KANPUR : भारत को वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को सबसे महत्वपूर्ण आधार मानते हुए नीति आयोग ने दीर्घकालिक रणनीति पर जोर दिया है। नीति…

IIT Kanpur’s C3iHub and realme India Launch ‘CyberSuraksha’ Workshop to Train Indian Army in Advanced Cyber Defense

47 frontline personnel from Kanpur Cantonment complete intensive two-day digital security training against evolving national threats G-INews KANPUR — In a major step toward bolstering national security against modern digital…