बिना सूचना वेबसाइट अपडेट करने पर उठे सवाल; नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम समेत कई शहरों में कामकाज ठप
G-INews ,Noida/ New Delhi : सीबीएसई (CBSE) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की प्रैक्टिकल परीक्षाओं के बीच बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब देशभर में बोर्ड का अंक अपलोडिंग पोर्टल अचानक ठप हो गया। नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, दिल्ली और तमिलनाडु सहित कई राज्यों के स्कूलों में शिक्षक और प्रधानाचार्य दिनभर स्क्रीन के सामने बैठे रहे, लेकिन तकनीकी खामी के कारण प्रैक्टिकल के नंबर दर्ज नहीं हो सके।
पोर्टल ‘डाउन’ होने से बढ़ी स्कूलों की टेंशन
बोर्ड के कड़े निर्देश हैं कि प्रैक्टिकल परीक्षा समाप्त होते ही उसी दिन अंक पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। बुधवार को परीक्षाएं तो समय पर पूरी हो गईं, लेकिन जब शिक्षकों ने पोर्टल खोला, तो वह पूरी तरह बंद मिला। प्रिंसिपल्स के व्हाट्सएप ग्रुप्स पर दिनभर सर्वर एरर की शिकायतों का दौर चलता रहा। घंटों की मशक्कत के बाद दोपहर बाद वेबसाइट बहाल हो सकी, जिससे स्कूलों के शेड्यूल पर बुरा असर पड़ा।
सीबीएसई का तर्क: ‘सिस्टम अपडेट’ के कारण आई बाधासीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने सफाई देते हुए कहा कि वेबसाइट को अपडेट करने के लिए कुछ समय के लिए बंद किया गया था। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि बाद में पोर्टल सुचारू रूप से चलने लगा और स्कूलों ने अंक अपलोड कर लिए होंगे।वहीं, गौतमबुद्धनगर की रीजनल डायरेक्टर एस धारिणी अरुण ने बताया कि तकनीकी दिक्कत की सूचना मिलते ही टीम को सक्रिय किया गया था और समस्या के समाधान के प्रयास किए गए।
अव्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
बोर्ड की इस ‘साइलेंट अपडेट’ प्रक्रिया ने स्कूलों और शिक्षकों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है। विशेषज्ञ और स्कूल प्रशासन निम्नलिखित सवाल उठा रहे हैं:
पूर्व सूचना का अभाव: अगर वेबसाइट अपडेट करनी थी, तो स्कूलों को पहले से सूचित क्यों नहीं किया गया?आर्थिक और मानसिक दबाव: पोर्टल बंद होने से बाहरी एग्जामिनरों को दोबारा बुलाना पड़ सकता है, जिससे स्कूलों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।संवेदनशीलता: बोर्ड परीक्षाओं जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान तकनीकी ढांचे का इतना कमजोर होना लापरवाही की ओर इशारा करता है।
छात्रों और अभिभावकों में चिंता
प्रैक्टिकल अंक समय पर अपलोड न होने की खबर से छात्रों और उनके अभिभावकों में भी घबराहट देखी गई। हालांकि बोर्ड ने आश्वासन दिया है कि तकनीकी खामियां दूर कर ली गई हैं और अंक समय पर दर्ज हो जाएंगे, लेकिन बार-बार हो रही इस तरह की गड़बड़ियों से बोर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।






