आईआईटी कानपुर में क्लाइमेट सत्याग्रह: दोगुनी रफ्तार से खत्म हो रहे पृथ्वी के संसाधन, बचाना जरूरी​

दोगुनी रफ्तार से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, अगली पीढ़ी का हिस्सा भी आज ही कर रहे खत्म: प्रो. चेतन सिंह सोलंकी​

कानपुर में ‘भारत क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा’ के तहत इंटरैक्टिव जलवायु जागरूकता कार्यशाला संपन्न

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु संकट से निपटने के लिए छात्रों और नागरिकों को दिलाया गया ‘सीमित जीवन संकल्प’

G-INews , KANPUR: ​ पृथ्वी पर मौजूद सीमित प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग करने में आज का मनुष्य अपनी अगली पीढ़ी के हिस्से का हक भी अभी खत्म कर रहा है। वर्तमान में संसाधनों के दोहन की यह दर 1.8 हो चुकी है, जो कि तय सीमा से लगभग दोगुनी रफ्तार को दर्शाती है। यदि इस अंधाधुंध उपभोग को तुरंत नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। यह चेतावनी “भारत के सोलर मैन” नाम से प्रसिद्ध पर्यावरणविद् प्रो. चेतन सिंह सोलंकी ने आईआईटी कानपुर में आयोजित एक विशेष कार्यशाला के दौरान दी।​

प्रसिद्ध पर्यावरण विद प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी के साथ उपस्थित जन समुदाय

आईआईटी कानपुर की शैक्षणिक एवं करियर परिषद (पीजी) ने केंद्रीय विद्यालय (केवी) आईआईटी कानपुर और विज्ञान भारती (विभा) ब्रह्मावर्त प्रांत के सहयोग से, “भारत क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा” के अंतर्गत इस महत्वपूर्ण जलवायु जागरूकता कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

​100 दिवसीय देशव्यापी आंदोलन का कानपुर बना केंद्र

​प्रो. चेतन सिंह सोलंकी के नेतृत्व में चल रहा यह 100-दिवसीय देशव्यापी आंदोलन देश के 51 शहरों में 5,800 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर रहा है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को जलवायु जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना और हमारे सीमित संसाधनों वाले ग्रह पर अत्यधिक खपत के गंभीर प्रभावों से निपटने के लिए “सीमित जीवन संकल्प” (Finite Living Pledge) लेने के लिए प्रेरित करना है। आईआईटी कानपुर का यह आयोजन इस राष्ट्रीय मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण स्थानीय केंद्र के रूप में उभरा, जिसमें तत्काल जलवायु कार्रवाई और स्थायी ऊर्जा प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी को स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया

​युवाओं और शैक्षणिक संस्थाओं का मजबूत समन्वय​

इस विशेष पहल का आयोजन शैक्षणिक एवं करियर परिषद (पीजी) के महासचिव, अनिमेष कुमार सोनी के कुशल नेतृत्व में किया गया। अपनी समर्पित टीम के सदस्यों—आशुतोष देशवाल, एएनसी पीजी के पूर्व महासचिव अमन शुक्ला और पूरी टीम के साथ मिलकर उन्होंने इस महत्वपूर्ण जलवायु जागरूकता कार्यशाला को परिसर के समुदाय तक लाने के लिए शैक्षणिक निकायों और बाहरी भागीदारों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।​ कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक स्वागत और दीप प्रज्वलन समारोह के साथ हुआ, जिसके बाद प्रो. सोलंकी और यात्रा के मिशन का औपचारिक परिचय दिया गया। उपस्थित जनों को आईआईटी कानपुर के प्रो. एस.एस.के. अय्यर, विभा के संयुक्त सचिव शिवम त्रिवेदी और केवी स्कूल आईआईटीके के प्राचार्य रवीश चंद्र पांडेय सहित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों ने संबोधित किया। केवी स्कूल की टीम, जिसमें विशेष रूप से सहाना रिज़वी शामिल थीं, ने भी इस आयोजन में एक महत्वपूर्ण सहयोगी भूमिका निभाई।​

कार्यशाला का शुभारंभ करते प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी डेन और शिवम त्रिवेदी बाय

150 मिनट की गहन कार्यशाला में सीखे ऊर्जा संरक्षण के गुर

​कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रो. चेतन सिंह सोलंकी द्वारा संचालित 150 मिनट की गहन कार्यशाला रही, जिसने उपस्थित लोगों को जलवायु शमन (Climate Mitigation) और ऊर्जा संरक्षण रणनीतियों के बारे में गहरी व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। सत्र के दौरान छात्रों ने विचारोत्तेजक संवादों और संवादात्मक प्रश्नोत्तर (Q&A) सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया। छात्रों ने इस बात पर गहराई से चर्चा की कि कैसे व्यक्तिगत जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी के जरिए प्रकृति की रक्षा की जा सकती है।​

प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी की एनर्जी स्वराज यात्रा की बस और अन्य गाड़ियां

कार्यशाला के समापन पर पर्यावरण जागरूकता में अभूतपूर्व योगदान के लिए छात्र जिमखाना, आईआईटी कानपुर की एएनसी परिषद के संकाय सलाहकार प्रो. राघवेंद्र कुमार चौधरी, पीजी महासचिव अनिमेष कुमार सोनी और विभा, कानपुर महानगर के संयोजक योगेश आर.जी. सिंह द्वारा प्रो. सोलंकी को औपचारिक रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का औपचारिक समापन विभा के आयोजन सचिव कौस्तुभ ओमर द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने संपूर्ण सहयोगी टीम के उत्कृष्ट संगठनात्मक प्रयासों की सराहना की।​

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