आईआईटी प्रोफेसरों ने तैयार किया दुनिया का पहला वेदर ट्रेडेड एक्सचेंज “RAINMUMBAI”

एनसीडीईएक्स (NCDEX) ने लॉन्च किया “RAINMUMBAI”: भारत का पहला एक्सचेंज-ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव और दुनिया का पहला शहर-आधारित वर्षा डेरिवेटिव

G-INews, New Delhi: भारत के कमोडिटी बाजार में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (NCDEX) ने “RAINMUMBAI” नाम से देश का पहला वेदर (मौसम) डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च करने की घोषणा की है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा अनुमोदित यह अनूठा उत्पाद न केवल भारत का पहला एक्सचेंज-ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव है, बल्कि किसी विशिष्ट महानगरीय क्षेत्र पर आधारित दुनिया का पहला एक्सचेंज-ट्रेडेड रेनफॉल (वर्षा) डेरिवेटिव भी है।


​इस अभूतपूर्व उत्पाद का ढांचा और आर्थिक डिजाइन आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के शैलेश जे. मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (SJMSOM) के प्रोफेसर पीयूष पांडे और प्रोफेसर सार्थक गौरव के नेतृत्व में तैयार किया गया है। बाजार में इस कॉन्ट्रैक्ट की लाइव ट्रेडिंग 1 जून, 2026 से शुरू होने जा रही है।
​”RAINMUMBAI” कॉन्ट्रैक्ट की मुख्य विशेषताएं

विवरण जानकारी


एक्सचेंज नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (NCDEX)
नियामक मंजूरी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI)
अकादमिक भागीदार आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay)
लाइव ट्रेडिंग की तारीख 1 जून, 2026 से शुरू
सेटलमेंट का प्रकार कैश-सेटल (नकद निपटान – इसमें किसी फिजिकल सर्वे की जरूरत नहीं होगी)

यह कैसे काम करता है? (क्युमुलेटिव डेविएशन रेनफॉल – CDR)


​पारंपरिक फसल या संपत्ति बीमा के विपरीत—जिसमें नुकसान के आकलन के लिए लंबे सर्वे और कागजी कार्रवाई से गुजरना पड़ता है—यह रेनफॉल डेरिवेटिव एक पैरामीट्रिक इंस्ट्रूमेंट के रूप में काम करता है:


ऐतिहासिक डेटा: यह कॉन्ट्रैक्ट मुंबई के पिछले 30 वर्षों (1991-2020) के मानसून इतिहास और लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) पर आधारित है।
सटीक माप (CDR): यह मॉडल मानसून के दौरान दर्ज की गई वास्तविक बारिश और ऐतिहासिक औसत के बीच के अंतर (मिलीमीटर में सटीक डेविएशन) को मापता है।


विश्वसनीय डेटा: इसके लिए बारिश का लाइव डेटा सीधे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के सांताक्रुज और कोलाबा स्थित आधिकारिक वेदर स्टेशनों से लिया जाएगा।
​जब भी वास्तविक बारिश ऐतिहासिक औसत से बहुत अधिक या बहुत कम होगी, तो इस कॉन्ट्रैक्ट की वित्तीय वैल्यू (कीमत) में उतार-चढ़ाव होगा। इससे मौसम के कारण होने वाले भारी वित्तीय नुकसान की भरपाई (Hedging) की जा सकेगी।


​किसे होगा इसका सबसे बड़ा फायदा?


​भारत की अर्थव्यवस्था में मानसून की अनिश्चितता हमेशा से एक बड़ा जोखिम रही है। “RAINMUMBAI” इस अनिश्चितता को एक मापने योग्य और व्यापार योग्य वित्तीय संपत्ति में बदल देता है। इससे नीचे दिए गए मौसम-संवेदनशील क्षेत्रों को भारी सुरक्षा मिलेगी:


कृषि और बैंकिंग क्षेत्र: एग्रीबिजनेस कंपनियां और बैंक जो ग्रामीण इलाकों में बड़े लोन पोर्टफोलियो संभालते हैं, वे खराब मानसून या सूखे के कारण होने वाले नुकसान से खुद को सुरक्षित रख सकेंगे।
​इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन: भारी बारिश के कारण जिन कंपनियों के कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट रुक जाते हैं या देरी से चलते हैं, वे इस कॉन्ट्रैक्ट के जरिए अपने वित्तीय नुकसान की हेजिंग कर सकेंगी।
​लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट: अत्यधिक बारिश और जलभराव के कारण डिलीवरी और सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों से होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकेगी।


​बिजली और उपयोगिता (Utilities): जलविद्युत (Hydroelectric) और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियां पानी की कमी या भारी बदलाव से होने वाले नुकसान का जोखिम कम कर सकेंगी।


​इस ऐतिहासिक खोज के पीछे का दिमाग
​यह उत्पाद वित्तीय गणित, डेटा साइंस और मौसम विज्ञान का एक अनूठा संगम है। आईआईटी बॉम्बे की एक समर्पित टीम ने इस पर काम किया है:


फैकल्टी लीड्स: प्रो. पीयूष पांडे और प्रो. सार्थक गौरव (SJMSOM)।
​प्रोजेक्ट एडवाइजरी कमेटी: आईआईटी बॉम्बे से प्रो. दीपक गुप्ता (SJMSOM), परमेश्वर डी. उदमाले (CTARA) और प्रो. ईश्वर राजसेकरन (सिविल)।
​छात्र टीम: निखिल किशोर (MBA 2026), आदित्य प्रताप (MBA 2026), अरीत मिश्रा (BTech सिविल, तृतीय वर्ष) और कीयान कार्तिकेय राजेश (BTech CSE, तृतीय वर्ष)।


​एनसीडीईएक्स (NCDEX) के अनुसार, यह लॉन्च भारत की क्लाइमेट इकोनॉमी (जलवायु अर्थव्यवस्था) के लिए एक नए युग की शुरुआत है। विज्ञान और फाइनेंस के इस मिलन से अब भारत में पर्यावरण और मौसम के जोखिमों को आधुनिक वित्तीय तरीकों से प्रबंधित किया जा सकेगा।

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