AI के दौर में शिक्षा का असली लक्ष्य ‘सीखना और सिखाना’ होना चाहिए: प्रो. शिरीष केदारे

IIT बॉम्बे के निदेशक ने TechEDU India Summit 2026 में कहा—डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सिर्फ तकनीक नहीं, शिक्षण पद्धति में मूलभूत बदलाव की मांग करता है

G-INews, Mumbai : Shireesh Kedare, निदेशक Indian Institute of Technology Bombay ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच शिक्षा व्यवस्था को केवल सूचना देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छात्रों को “सीखना कैसे सीखें” यह सिखाने पर ध्यान देना होगा।

प्रोफेसर शिरीष कडरे दीप प्रज्वलित करते हुए

मुंबई के NESCO Center में 26 फरवरी को आयोजित Economic Times TechEDU India Summit 2026 में मुख्य वक्तव्य देते हुए प्रो. केदारे ने कहा कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का वास्तविक उद्देश्य केवल तकनीकी पहुंच और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा की पूरी पद्धति को नए सिरे से परिभाषित करना है। उन्होंने कहा कि AI और डिजिटल टूल्स शिक्षा को अधिक व्यक्तिगत (personalised) और स्थानीय संदर्भों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इनके माध्यम से भारतीय भाषाओं और बोलियों में भी प्रभावी सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि तकनीक का केवल सतही उपयोग शिक्षा को बेहतर नहीं बना पाएगा।Wadhwani School of Artificial Intelligence & Intelligent Systems-IIT Kanpur

प्रो. केदारे ने कहा, “हमें ‘टीचिंग’ से ‘लर्निंग’( Teaching to learning) की ओर बदलाव करना होगा। केवल जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, छात्रों को यह सिखाना जरूरी है कि वे सीखना कैसे सीखें।”अपने संबोधन में उन्होंने भारत के लिए “डीप टेक” क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के बीच एक स्पष्ट और संरचित रास्ता तैयार करना होगा, जिससे प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकें उद्योग और समाज तक पहुंच सकें।इसके लिए उन्होंने रिसर्च से इन्क्यूबेशन और फिर दीर्घकालिक निवेश (patient capital) तक मजबूत तंत्र बनाने की आवश्यकता बताई।​IIT Madras Researchers Unveil Non-Toxic ‘Green’ Breakthrough for Global E-Waste Crisis

प्रो. केदारे ने छात्रों को केवल तेजी से स्टार्टअप शुरू करने की प्रवृत्ति से आगे बढ़कर दीर्घकालिक और उच्च प्रभाव वाले नवाचारों पर ध्यान देने की सलाह दी। उनके अनुसार, “भारत के पास डीप टेक में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का अवसर है, बशर्ते हम अनुसंधान और नवाचार को टिकाऊ रूप से आगे बढ़ाएं।”शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि AI और डिजिटल तकनीक के तेजी से विस्तार के बीच प्रो. केदारे का यह दृष्टिकोण भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, नवाचारी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है।

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