चार विश्वविद्यालयों के लिए कैंसर शोध का केंद्र बनेगा IIT कानपुर

एएनआरएफ–पेयर कार्यक्रम के तहत निभाएगा हब की भूमिका,

तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन से हुई शुरुआत

G-INews, KANPUR :देश में कैंसर से जुड़ी शोध गतिविधियों को नई दिशा देने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर अब एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार के अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के अंतर्गत संचालित पार्टनरशिप्स फॉर एक्सीलरेटेड इनोवेशन एंड रिसर्च (PAIR) कार्यक्रम के तहत IIT कानपुर को कैंसर जीनोमिक्स, डायग्नोस्टिक्स और थेरेप्यूटिक्स के क्षेत्र में ‘हब’ संस्थान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस हब से जुड़कर देश के चार प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान—किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ; छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर; रेवेनशॉ विश्वविद्यालय, ओडिशा; और NIT अरुणाचल प्रदेश—स्पोक संस्थानों के रूप में कार्य करेंगे। इस साझेदारी का उद्देश्य उन विश्वविद्यालयों में अनुसंधान की क्षमता को सशक्त बनाना है, जहां शोध का वातावरण अभी विकासशील अवस्था में है।

उभरते संस्थानों को मिलेगी अत्याधुनिक सुविधाओं की पहुंच

इस कार्यक्रम के तहत स्पोक विश्वविद्यालयों को IIT कानपुर की विश्वस्तरीय प्रयोगशालाओं, उन्नत अनुसंधान उपकरणों, पशु प्रयोग सुविधाओं और विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन का लाभ मिलेगा। इससे कैंसर से जुड़े बुनियादी शोध को क्लीनिकल और उपचार आधारित अनुसंधान से जोड़ने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय सम्मेलन में मंथन

इसी क्रम में 28 से 30 जनवरी के बीच IIT कानपुर परिसर में कैंसर जीनोमिक्स, डायग्नोस्टिक्स और थेरेप्यूटिक्स विषय पर एक तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में कैंसर जीनोमिक्स, बायोमार्कर खोज, इम्यूनोथेरेपी और प्रिसीजन मेडिसिन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन के आयोजक एवं कैंसर थीम की प्रमुख शोधकर्ता प्रो. बुशरा अतीक और सह-आयोजक प्रो. राकेश माझी ने बताया कि इस सहयोगी मॉडल से प्रयोगशाला में होने वाले शोध को मरीजों के उपचार तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज होगी।

फ्लो साइटोमेट्री पर विशेष कार्यशाला

सम्मेलन के दौरान BD बायोसाइंसेज के सहयोग से फ्लो साइटोमेट्री पर एक विशेष व्यावहारिक कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें शोधार्थियों को उन्नत कोशिका विश्लेषण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे कैंसर अनुसंधान में आधुनिक तकनीकों का बेहतर उपयोग कर सकें।

एएनआरएफ वैज्ञानिक ने रखी कार्यक्रम की दृष्टि

एएनआरएफ के वैज्ञानिक डॉ. टी. थंगाराड्जौ ने कहा कि पेयर कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शोध पत्र प्रकाशित करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक खोजों को सीधे समाज और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है। यह पहल देश में समान और सशक्त अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में अहम कदम है।

200 से अधिक वैज्ञानिकों की भागीदारी

सम्मेलन का उद्घाटन CSJMU के प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी और IIT कानपुर के डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. तरुण गुप्ता ने किया। इस अवसर पर देशभर से आए 200 से अधिक वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। छात्रों ने पोस्टर प्रस्तुतियों और लघु व्याख्यानों के माध्यम से अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए, जिनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय स्तर पर शोध सहयोग को मिलेगी गति

ANRF–PAIR कार्यक्रम के तहत IIT कानपुर की यह पहल न केवल कैंसर अनुसंधान को गति देगी, बल्कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के बीच मेंटॉरशिप आधारित सहयोग, संसाधन साझा करने और क्षमता निर्माण को भी मजबूत करेगी। इससे आने वाले वर्षों में भारत की कैंसर अनुसंधान क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है।

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