GIN, कानपुर: आईआईटी कानपुर के हॉस्टल में बीटेक छात्र जय सिंह मीणा की आत्महत्या का मामला अब एक गहरा रहस्य बनता जा रहा है। परिजनों के बयानों ने संस्थान के भीतर “किसी शक्तिशाली ताकत” के खौफ और संभावित प्रताड़ना की ओर इशारा किया है।”पापा की कसम खाओ, क्या किसी का फोन आया?”अजमेर निवासी जय सिंह मीणा आईआईटी कानपुर में बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष का छात्र था। उसके बड़े भाई धर्मेंद्र मीणा ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि जय पिछले एक साल से गहरे तनाव और डर में था। वह अक्सर घर फोन करता और घरवालों से पूछता था कि क्या किसी सीनियर या दोस्त ने उन्हें फोन किया है? जब घरवाले मना करते, तो वह अपने दिवंगत पिता की कसम देकर सच उगलवाने की कोशिश करता था।”हम कुछ नहीं कर सकते…”जब भी परिवार जय से इस डर का कारण पूछता, तो वह बस इतना कहता, “वे लोग बहुत पावरफुल हैं, हम कुछ नहीं कर सकते, पर मैं सब ठीक कर लूंगा।” जय के मन में खौफ इतना गहरा था कि उसने अपने परिवार को आईआईटी कैंपस में आने से भी सख्त मना कर रखा था। वह नहीं चाहता था कि उसके परिवार का सामना उन “ताकतवर लोगों” से हो।आत्महत्या से पहले की कशमकशघटना वाले दिन के घटनाक्रम ने परिवार को और झकझोर दिया है:रविवार रात: जय ने अपनी माँ से फोन पर बात की और कहा कि वह सोमवार शाम घर आ रहा है। उसने माँ का पहले से तय रिजर्वेशन भी कैंसिल करवा दिया ताकि वे साथ जा सकें।सोमवार सुबह: जब भाई ने रिजर्वेशन के लिए फोन किया, तो जय ने 50 से ज्यादा कॉल नहीं उठाए।कमरे का मंजर: शक होने पर जब खिड़की से देखा गया, तो जय का शव फंदे से लटका था। पुलिस जांच में पता चला कि जय ने पहले अपनी कलाई की नस काटी और फिर फांसी लगा ली, जो उसके भीतर के भीषण मानसिक द्वंद्व को दर्शाता है।पुलिस जांच और तहरीरजय की बहन, जो पेशे से डॉक्टर हैं, उन्होंने कल्याणपुर थाने में अज्ञात के खिलाफ डराने और धमकाने की आशंका जताते हुए तहरीर दी है। पुलिस अब जय के कॉल रिकॉर्ड्स और कैंपस के संपर्कों की जांच कर रही है ताकि उन “पावरफुल लोगों” का सुराग मिल सके जिनका जिक्र जय अक्सर करता था।क्या आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अभी भी पर्दे के पीछे कोई ऐसा दबाव है जो मेधावी छात्रों को मौत को गले लगाने पर मजबूर कर रहा है? पुलिस की जांच अब इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूम रही है।






