टिकाऊ खेती पर CSJM University में वैश्विक मंथन शुरू, अंतरराष्ट्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में कृषि नवाचार पर जोर

G-INews , KANPUR : छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के स्कूल ऑफ एडवांस्ड एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी द्वारा ‘सतत कृषि’ (Sustainable Agriculture) के भविष्य को संवारने के लिए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। विश्वविद्यालय के वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में प्राचीन भारतीय कृषि पद्धतियों और आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों के समन्वय पर जोर दिया गया।​

अंतरराष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में स्मारिका विमोचन करते अतिथि गण

​17-18 अप्रैल तक चलने वाले इस सम्मेलन का आयोजन इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) के सहयोग से किया जा रहा है, जिसमें चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) की भी सक्रिय सहभागिता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कानपुर मंडल के आयुक्त और CSA के कुलपति के. विजयेंद्र पांडियन रहे। उन्होंने सतत कृषि के विकास के लिए ठोस नीतिगत सहयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति व कानपुर के मंडल आयुक्त के विजयेंद्र पांडियन को स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक

​प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम​

अध्यक्षीय उद्बोधन में सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि भारतीय प्राचीन ज्ञान प्रणाली और आधुनिक कृषि नवाचारों का एकीकरण ही आने वाले समय में कृषि क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने इस सम्मेलन को ज्ञान-विनिमय का एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच करार दिया।​ इससे पूर्व, आयोजन संयोजक एवं निदेशक डॉ. हिमांशु त्रिवेदी ने स्वागत भाषण के माध्यम से सम्मेलन की थीम स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक प्रयोगों का संतुलन ही भविष्य की खेती को टिकाऊ बना सकता है।

सम्मेलन को संबोधित करते सीएसजेएमयू के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक

​वैश्विक विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

​सम्मेलन में देश-विदेश के विख्यात विशेषज्ञों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए:​डॉ. उलरिच बर्क (जर्मनी): उन्होंने ‘अग्निहोत्र’ और ‘होमा फार्मिंग’ के जरिए पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि की अवधारणा पर प्रकाश डाला।

​डॉ. राघवेंद्र सिंह (निदेशक, ICAR-ATARI): कृषि विस्तार तंत्र में नए नवाचारों की जरूरत पर बल दिया।​डॉ. जी.पी. दीक्षित (निदेशक, ICAR-IIPR) ने दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।​प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी (प्रति कुलपति): शिक्षा और अनुसंधान के तालमेल को कृषि विकास की आधारशिला बताया।

​तकनीकी सत्र और स्मारिका विमोचन

​आयोजन सचिव डॉ. श्रेया सिंह ने सम्मेलन की रूपरेखा और तकनीकी सत्रों की जानकारी दी। इस अवसर पर ‘कॉन्फ्रेंस स्मारिका’ एवं ‘बुक ऑफ एब्स्ट्रैक्ट्स’ का विमोचन भी किया गया। तकनीकी सत्रों में डॉ. आर.के. पाठक ने ‘कॉस्मिक फार्मिंग’, डॉ. एस.के. चतुर्वेदी ने फसल सुधार, डॉ. शिव दत्त ने बौद्धिक संपदा अधिकार और डॉ. दीपा एच. द्विवेदी ने कृषि में नैनोटेक्नोलॉजी के महत्व को समझाया। ​इस दो दिवसीय आयोजन में सह-संयोजक डॉ. वी.के. त्रिपाठी और डॉ. कौशल कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही। यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों को एक साझा मंच प्रदान कर कृषि क्षेत्र में नए क्रांतिकारी बदलावों का मार्ग प्रशस्त करेगा।​

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