CSJMU में अंतरराष्ट्रीय कृषि सम्मेलन 2026 संपन्न: आधुनिक नवाचार और वैदिक ज्ञान से बदलेगी खेती की तस्वीर

G-INews, KANPUR :: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के स्कूल ऑफ एडवांस्ड एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कृषि सम्मेलन 2026 का शनिवार को भव्य समापन हुआ। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ऑडिटोरियम में आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य केंद्रबिंदु ‘सतत कृषि के लिए प्राचीन ज्ञान और आधुनिक नवाचारों का समन्वय’ रहा। ​इस महत्वपूर्ण आयोजन में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) का सहयोग और चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) की सक्रिय सहभागिता रही।

​डिजिटल एग्रीकल्चर और फार्म मेकेनाइजेशन पर जोर

​समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. इंद्र मणि मिश्रा (कुलपति, वसंतराव नाईक मराठवाडा कृषि विद्यापीठ, महाराष्ट्र) ने “जर्नी ऑफ फार्म मेकेनाइजेशन: फ्रॉम बुलॉक-ड्रॉन इम्प्लीमेंट्स टू डिजिटल एग्रीकल्चर” विषय पर शोधपरक व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कैसे भारतीय कृषि बैलों से चलने वाले हल से लेकर आज एआई (AI) और डिजिटल सेंसर तक पहुँच गई है।​

प्रमुख विशेषज्ञों के विचार :​

डॉ. वाई.सी. गुप्ता ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए फूलों की खेती (Flori-entrepreneurship) में पारंपरिक और आधुनिक तरीकों के मेल पर जोर दिया।

जर्मनी से आए डॉ. उलरिच बर्क ने अग्निहोत्र एवं होमा फार्मिंग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर अग्निहोत्र करके भी दिखाया।

कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ​डॉ. प्रभात कुमार (आयुक्त, बागवानी) ने कृषि उद्यमिता और मूल्य श्रृंखला विकास (Value Chain Development) के नए आयामों पर प्रकाश डाला।​

डॉ. के.एन. तिवारी ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैदिक कृषि ज्ञान और आधुनिक तकनीक के एकीकरण को अनिवार्य बताया।​

स्टार्ट-अप पिचिंग: खेती में नए बिजनेस मॉडल​सम्मेलन का एक विशेष आकर्षण स्टार्ट-अप पिचिंग सत्र रहा, जिसकी अध्यक्षता समीर शेख ने की। इसमें ‘कृषार्थ’, ‘ग्रोबॉन प्रा. लि.’ और ‘मार्केटिंग टेक्नीक्स ग्रुप’ जैसे उभरते स्टार्टअप्स ने अपने नवाचारी बिजनेस मॉडल पेश किए। इन स्टार्टअप्स ने दिखाया कि कैसे तकनीक के माध्यम से कृषि विपणन (Marketing) और किसानों की आय में सुधार किया जा सकता है।

​आयोजन सचिव डॉ. जितेन्द्र ओझा ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश-विदेश के 400 से अधिक वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान एक ‘कॉन्फ्रेंस स्मारिका’ और ‘बुक ऑफ एब्स्ट्रैक्ट्स’ का विमोचन भी किया गया।​

आयोजन टीम की भूमिका:विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश मिश्रा के प्रशासनिक सहयोग और आयोजन संयोजक डॉ. हिमांशु त्रिवेदी के कुशल मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। सह-संयोजक डॉ. वी.के. त्रिपाठी, डॉ. कौशल कुमार और आयोजन सचिव डॉ. श्रेया सिंह ने तकनीकी सत्रों और शोध प्रस्तुतियों के सफल संचालन में मुख्य भूमिका निभाई।​

यह सम्मेलन न केवल ज्ञान के आदान-प्रदान का माध्यम बना, बल्कि इसने सतत कृषि (Sustainable Agriculture) के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है, जहाँ प्राचीन भारतीय पद्धतियाँ और आधुनिक विज्ञान एक साथ काम करेंगे।

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