UPI की तर्ज पर अब देश में लॉन्च होगा ‘UHI’ मॉडल​, मोबाइल फोन पर मिलेगी सभी स्वास्थ्य सुविधाएं

​ देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में आएगी बड़ी क्रांति

G-INews, KANPUR : भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में अब एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। यूपीआई (UPI- Unifide Payments Interface) की अपार सफलता के बाद, अब स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI -Unifide Health Interface) मॉडल लॉन्च होने के लिए पूरी तरह तैयार है। आईआईटी कानपुर में आयोजित ‘डिजिटल हेल्थ स्टैक’ कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।​

UHI: एक क्लिक पर मिलेगी अस्पताल, एम्बुलेंस और दवाओं की जानकारी

​डॉ. बरनवाल ने बताया कि UHI मॉडल के आने से स्वास्थ्य सेवाएं पारदर्शी और सुलभ हो जाएंगी।​तुलना करना होगा आसान: नागरिक अपनी जरूरत के हिसाब से अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवाओं, दवाओं और जांच रिपोर्ट की उपलब्धता व उनके मूल्यों की तुलना कर सकेंगे।​गुणवत्ता पर जोर: यह मॉडल न केवल मरीजों को सही चुनाव करने में मदद करेगा, बल्कि सेवा प्रदाताओं के बीच गुणवत्ता सुधारने की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ाएगा।​

आईआईटी कानपुर बनेगा भारतीय AI मॉडल का केंद्र​कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में उपलब्ध एआई (AI) मॉडल विदेशी डेटा पर आधारित हैं, जो भारतीय आबादी के लिए पूरी तरह सटीक नहीं हो सकते।​देसी डेटा, सटीक समाधान: एनएचए के पास मौजूद 11 करोड़ भारतीयों के हेल्थ डेटा की मदद से नए एआई मॉडल विकसित किए जाएंगे।

​प्रमाणन और ईको-सिस्टम: आईआईटी कानपुर एक ऐसा ईको-सिस्टम और प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है, जो इन एआई मॉडलों की सटीकता और वैधता को प्रमाणित करेगा।​ प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल (निदेशक, आईआईटी कानपुर) ने कहा कि विशेषज्ञों की टीम भारतीय स्वास्थ्य डेटा पर आधारित सुरक्षित और विश्वसनीय एआई प्लेटफॉर्म विकसित करने की चुनौती पर काम कर रही है।​

यूपी सरकार का ₹2000 करोड़ का ‘एआई मिशन’

उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को हाई-टेक बनाने के लिए 2000 करोड़ रुपये का राज्य एआई मिशन शुरू कर रही है।​प्रदेश के 1200 अस्पतालों में डिजिटल पर्चा और ऑनलाइन परामर्श की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।​लखनऊ के सरोजनीनगर में कैंसर स्क्रीनिंग और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा मोतियाबिंद की जांच जैसे कार्यों में डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

बिहार बना डिजिटलीकरण में अग्रणी

​डॉ. बरनवाल ने स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण का उदाहरण देते हुए बताया कि बिहार देश का पहला राज्य बन गया है, जहाँ विकास खंड (ब्लॉक) से लेकर जिला स्तर तक रोगियों का पंजीकरण, परामर्श और रिपोर्ट पूरी तरह डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।​

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