सावधान! हॉस्टलों की खराब हवा और गर्मी छीन रही है छात्रों की नींद

IIT कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर अनुभा गोयल के शोध से उजागर हुआ बड़ा सत्य

G-INews, KANPUR:: भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों (Higher Education Institutes) के हॉस्टलों में रहने वाले छात्र एक अदृश्य संकट का सामना कर रहे हैं। आईआईटी कानपुर की प्रोफेसर अनुभा गोयल के हालिया अध्ययन और विभिन्न वैश्विक शोधों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि हॉस्टलों में वेंटिलेशन की कमी और बढ़ता तापमान न केवल छात्रों की नींद खराब कर रहा है, बल्कि उनके शैक्षणिक प्रदर्शन (Academic Performance) को भी सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।​

2035 तक 31 मिलियन यानी 3 करोड़ 10 लाख छात्र होंगे हॉस्टलों के भरोसे​’

ऑल-इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन 2022′ के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। वर्तमान में देश के लगभग 50,000 हॉस्टलों में 40 लाख से ज्यादा छात्र रह रहे हैं। अनुमान है कि 2035-36 तक यह संख्या बढ़कर 31 मिलियन हो जाएगी। ऐसे में यूनिवर्सिटी हॉस्टलों की मांग और वहां की आंतरिक पर्यावरणीय गुणवत्ता (IEQ) एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

​नींद का सीधा कनेक्शन आपके ‘ग्रेड्स’ से​

प्रोफेसर गोयल के विश्लेषण के अनुसार, नींद केवल थकान मिटाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह कॉग्निटिव परफॉर्मेंस यानी सीखने और समझने की क्षमता को बढ़ाती है।​

इमोशनल रेगुलेशन: भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद करती है।​

एकेडमिक रिकॉर्ड: जो छात्र कम नींद लेते हैं, उनके ग्रेड्स (Grades) उन छात्रों की तुलना में काफी कम आते हैं जो पर्याप्त नींद लेते हैं।​

हॉस्टलों की तीन बड़ी दुश्मन: गर्मी, CO_2 और खराब वेंटिलेशन

​अध्ययन में हॉस्टलों की बदतर स्थिति को लेकर कई वैज्ञानिक प्रमाण दिए गए हैं:​1. तापीय असुविधा (Thermal Discomfort):चीन और ऑस्ट्रेलिया में हुए अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया गया कि जब बेडरूम का तापमान बढ़ता है, तो नींद आने में देरी (SOL) होती है। तापमान में हर एक डिगरी ^\circ C की वृद्धि नींद की दक्षता को 0.16% तक कम कर देती है। अधिक गर्मी ‘आरईएम’ (REM) नींद को कम कर देती है, जो मस्तिष्क के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण है।​

प्रोफेसर अनुभा गोयल अपने ऑफिस में काम करने के दौरान

2. CO_2 का खतरनाक स्तर : ज्यादातर हॉस्टल प्राकृतिक वेंटिलेशन (खिड़की-दरवाजे) पर निर्भर हैं। बंद कमरों में रात भर में कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) का स्तर 5000 ppm तक पहुंच जाता है, जबकि 1000 ppm से ऊपर का स्तर ही नींद की गुणवत्ता खराब करने के लिए काफी है। इटली के एक अध्ययन के अनुसार, CO_2 में हर 100 ppm की वृद्धि नींद की गुणवत्ता को 0.29% कम कर देती है।​

3. वायु प्रदूषण का प्रभाव:अध्ययन बताता है कि उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने वाले छात्र गहरी नींद की कमी को पूरा करने के लिए अधिक देर तक सोते हैं, लेकिन फिर भी वे सुबह थकान महसूस करते हैं।​

प्रोफेसर अनुभाग गोयल के शोध पर आधारित इंफोग्राफ

समाधान: क्या करने की है जरूरत?​

प्रोफेसर गोयल के निष्कर्ष बताते हैं कि हॉस्टलों के डिजाइन और वेंटिलेशन सिस्टम में आमूल-चूल बदलाव की जरूरत है:।

वेंटिलेशन के तरीके: खिड़कियां खुली रखना या मैकेनिकल वेंटिलेशन सिस्टम (एग्जॉस्ट आदि) का अनिवार्य इस्तेमाल।

​थर्मल रेगुलेशन: कमरों के तापमान को एक ‘न्यूट्रल रेंज’ में बनाए रखना ताकि छात्र जल्दी और गहरी नींद ले सकें।​

प्रोफेसर अनुभा गोयल सिविल इंजीनियरिंग विभाग आईआईटी कानपुर

जागरूकता: छात्रों को सोने के समय ठंडे वातावरण और सुबह उठते समय हल्की गर्माहट के महत्व को समझाना।​

निष्कर्ष: यदि समय रहते हॉस्टलों की इनडोर पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया, तो भारत की एक बड़ी युवा आबादी न केवल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझेगी, बल्कि उनकी बौद्धिक क्षमता पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।​

हॉस्टल लाइफ: बेहतर नींद और अच्छे ग्रेड्स के लिए स्मार्ट टिप्स

​1. हवा का खेल (Ventilation is Key)​खराब वेंटिलेशन से CO_2 का स्तर 5000 ppm तक जा सकता है, जो दिमाग को सुस्त बनाता है।​खिड़की खुली रखें: सोते समय क्रॉस-वेंटिलेशन सुनिश्चित करें।​

एग्जॉस्ट फैन: यदि कमरा छोटा है, तो रात में कुछ देर एग्जॉस्ट फैन जरूर चलाएं।​

दरवाजे का गैप: कमरे के दरवाजे के नीचे थोड़ी जगह छोड़ें ताकि ताजी हवा का संचार हो सके।

​2. तापमान नियंत्रण (Thermal Comfort)​तापमान में 1^\circ C की वृद्धि आपकी नींद की क्षमता को 0.16% कम कर देती है।​

कूलिंग इफेक्ट: सोने से पहले कमरे को ठंडा रखने की कोशिश करें।​बिस्तर का चयन: सूती (Cotton) चादरों का प्रयोग करें, जो पसीना सोखती हैं और शरीर को ठंडा रखती हैं।​

उचित पहनावा: ढीले और सांस लेने योग्य (Breathable) कपड़े पहनें।​

3. ‘स्लीप साइकिल’ का विज्ञान (The Science of Sleep)​गहरी नींद (REM Sleep) ही आपकी याददाश्त और सीखने की क्षमता बढ़ाती है।​

अंधेरा रखें: नीली रोशनी (Mobile/Laptop) CO_2 से भी ज्यादा खतरनाक है। सोने से 30 मिनट पहले स्क्रीन बंद कर दें।​

शांति: यदि हॉस्टल में शोर है, तो ईयरप्लग्स (Earplugs) का इस्तेमाल करें।​

निश्चित समय: रोज एक ही समय पर सोने की आदत डालें ताकि शरीर का ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ सेट रहे।

​4. वायु गुणवत्ता (Air Quality)​प्रदूषण आपकी गहरी नींद को छीन लेता है।​

इनडोर प्लांट्स: यदि संभव हो, तो ‘स्नेक प्लांट’ या ‘एलोवेरा’ जैसे पौधे रखें जो रात में ऑक्सीजन देते हैं।

​सफाई: कमरे में धूल जमा न होने दें, क्योंकि धूल के कण श्वसन मार्ग में बाधा डालते हैं।​

प्रो टिप: “अच्छी नींद का मतलब केवल ज्यादा देर तक सोना नहीं, बल्कि गहरी और शुद्ध हवा में सोना है। यह आपके अगले दिन के लेक्चर को समझने की शक्ति को 20% तक बढ़ा सकता है।”

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