हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: कानपुर में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, AI की चुनौतियों और भारतीय भाषा मॉडल पर हुआ मंथन

G-INews , KANPUR : छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा हिंदी पत्रकारिता के गौरवमयी 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के शिक्षाविदों ने पत्रकारिता के बदलते परिदृश्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव पर गंभीर चर्चा की।​

कार्यक्रम को संबोधित करते प्रोफेसर विनय कुमार पाठक कुलपति सीएसजेएमयू

हिंदी पत्रकारिता की यात्रा और भविष्य ​संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने ‘उदंत मार्तंड’ (1826) से लेकर आज के डिजिटल और AI युग तक के सफर को रेखांकित किया।​ भारतीय भाषा मॉडल (LLM): कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने स्वदेशी लैंग्वेज लर्निंग मॉडल विकसित करने पर जोर दिया।​

AI बनाम मानवीय बुद्धिमत्ता: वक्ताओं ने कहा कि तकनीक के दौर में भी मानवीय संवेदनाएं और नैतिकता ही पत्रकारिता की नींव रहेंगी।​ चीन और नेपाल जैसे देशों से जुड़े विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की बढ़ती धमक पर विचार व्यक्त किए । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि पत्रकारिता के छात्रों को एआई टूल्स (AI Tools) का उपयोग सीखना चाहिए, लेकिन साथ ही हमें अपनी भाषाई शुद्धता बनाए रखने के लिए स्वदेशी लैंग्वेज लर्निंग मॉडल पर काम करना होगा।​

मुख्य अतिथि प्रो. राममोहन पाठक ने भगवद्गीता और रामायण के उदाहरण देते हुए पत्रकारिता को संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को नेतृत्व और प्रबंधन के सूत्र भी सिखाए।​

इतिहास और वर्तमान का संगम: 1826 से डिजिटल युग तक

​वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला ने बताया कि पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा शुरू की गई परंपरा आज “फिंगरटिप” सूचना के दौर में पहुँच गई है। उन्होंने गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे महान व्यक्तित्वों के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि आज विश्वसनीयता की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है।​ञवहीँ, दूसरे सत्र के मुख्य अतिथि अमिताभ अग्निहोत्री ने दो टूक कहा कि पत्रकार का काम केवल सूचना देना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को साहस के साथ उठाना है। उन्होंने डिजिटल मीडिया के दौर में मौलिकता बनाए रखने की सलाह दी।​

प्रमुख वक्ताओं के विचार:

विशेष आकर्षण: 1947 के बाद के अखबारों की प्रदर्शनी

​संगोष्ठी के दौरान विश्वविद्यालय के तात्या टोपे सीनेट हॉल में आजादी के बाद के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं की एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने इसका उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में छात्रों ने पत्रकारिता के विकासवादी इतिहास को करीब से देखा। साथ ही, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

​धन्यवाद ज्ञापन: कार्यक्रम का समापन कुलसचिव राकेश कुमार मिश्र के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. दिवाकर अवस्थी, डॉ. उमेश पालीवाल और विभाग के अन्य शिक्षक व शोधार्थी उपस्थित रहे।​

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष, CSJMU International Seminar, AI in Journalism.​

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