GIN , कानपुर। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक क्वांटम टेक्नोलॉजी में देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। संस्थान को क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर अनुसंधान की जिम्मेदारी मिली है। इस अनुसंधान में आईआईटी बांबे की टीम भी मदद करेगी। यह जिम्मेदारी भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत सौंपी है। इस मिशन की सफलता के लिए मंत्रालय ने देश के चार प्रतिष्ठित संस्थानों को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी है। इसमें आईआईटी कानपुर के अलावा आईआईटी बांबे, आईआईटी दिल्ली और आईआईएससी बेंगलुरू शामिल हैं। इसकी घोषणा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक कार्यक्रम में की है।
आईआईटी के वैज्ञानिकों के मुताबिक मंत्रालय की ओर से क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी आईआईटी कानपुर और आईआईटी बांबे को सौंपी गई है। आईआईएससी बेंगलुरू और आईआईटी बांबे के वैज्ञानिक सुपरकंडक्टिंग, फोटोनिक और स्पिन क्यूबिट्स का इस्तेमाल करके क्वांटम फैब्रिकेशन को आगे बढ़ाएंगे। आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक क्वांटम मटीरियल और डिवाइस डेवलपमेंट इकोसिस्टम को होस्ट करेंगे। करीब 700 करोड़ रुपये के बजट से चार संस्थानों में क्वांटम फैब्रिकेशन एंड सेंट्रल फैसिलिटी पर काम होगा। क्वांटम सेंसिंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम मटीरियल तक फैली नई फैब्रिकेशन और कैरेक्टराइजेशन क्षमताएं देश के अंदर सॉवरेन, सिक्योर, स्केलेबल क्वांटम डिवाइस और सिस्टम बनाने के लिए जरूरी बेसिक हार्डवेयर इकोसिस्टम का काम करेंगी। इस फैसिलिटी से एकेडमिक, इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स की राह भी आसान व मजबूत होगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक क्वांटम टेक्नोलॉजी की मदद से कंप्यूटर की क्षमता में इजाफा हो जाता है। यह एक साथ सुपरपोजिशन पर रह सकता है। इससे अनुसंधान की क्षमता में वृद्धि और समय में कमी आती है।






