सीएसजेएमयू (CSJMU) में होने जा रहा यह आयोजन ‘भाषा’ और ‘भविष्य की तकनीक’ (AI) के संगम का गवाह बनेगा
G-INews, KANPUR : तकनीक के इस दौर में जहाँ दुनिया ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के इर्द-गिर्द सिमट रही है, वहीं भारतीय भाषाओं को इस बदलाव के साथ कैसे जोड़ा जाए, इस पर उत्तर प्रदेश के प्रमुख विश्वविद्यालय, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में एक ऐतिहासिक चर्चा होने जा रही है।विश्वविद्यालय के भाषा संकाय और भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 30 और 31 जनवरी 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
संगोष्ठी का मुख्य विषय:“भारतीय भाषा परिवार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): 21वीं सदी की चुनौतियाँ और संभावनाएँ”तात्या टोपे सभागार में सजेगी वैचारिक चौपालयह आयोजन विश्वविद्यालय के भव्य सेनानायक तात्या टोपे सभागार में संपन्न होगा। खास बात यह है कि यह संगोष्ठी हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में होगी, जिससे देश-दुनिया के विद्वान कहीं से भी अपनी बात रख सकेंगे।
प्रमुख बिंदु: क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन?डिजिटल नवाचार: शिक्षा, शोध और अनुवाद के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना।
ग्लोबल पहचान: मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने और औपनिवेशिक भाषा-वर्गीकरण से मुक्त होकर भारतीय भाषाओं को वैश्विक पटल पर लाना।
शोध का भंडार: इस संगोष्ठी में देश भर से 200 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इन चुनिंदा शोध-पत्रों को ISBN के साथ पुस्तक रूप में प्रकाशित किया जाएगा, जो भविष्य के शोधार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
भाषा और तकनीक का समन्वय
“हम भारतीय भाषाओं को केवल किताबी अध्ययन का विषय नहीं रहने देना चाहते। हमारा लक्ष्य इन्हें तकनीक और बौद्धिक भविष्य की आधारशिला बनाना है। AI के साथ समन्वय आज की सबसे बड़ी जरूरत है। “
डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी (समन्वयक एवं निदेशक, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज)
“AI केवल एक मशीन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और मानवीय मूल्यों को दुनिया तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है। यह संगोष्ठी भाषाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
डॉ. श्रीप्रकाश (संयोजक एवं प्रभारी, हिन्दी विभाग)






