G-INews,KANPUR :भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनाने के विजन को गति देते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के एडवांस्ड सेंटर फॉर मैटेरियल्स साइंस (ACMS) ने विश्व प्रसिद्ध संस्थान ‘एप्लाइड मैटेरियल्स इंडिया’ के सहयोग से बुधवार को “ड्राइविंग सेमीकंडक्टर ग्रोथ थ्रू डिजिटल इनोवेशन” विषय पर एक दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे डिजिटल ट्विन और सॉफ्टवेयर सिमुलेशन के जरिए भविष्य की चिप निर्माण प्रक्रिया को सरल और सटीक बनाया जा सकता है।

AppliedTwin™ सॉफ्टवेयर बनेगा शोध का आधार
कार्यशाला में एप्लाइड मैटेरियल्स ने अपना अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर फ्रेमवर्क ‘AppliedTwin™’ प्रस्तुत किया। यह एक ऐसा डिजिटल ट्विन समाधान है जो सेमीकंडक्टर निर्माण में प्रयुक्त होने वाले जटिल उपकरणों और प्रक्रियाओं के मॉडलिंग के लिए विकसित किया गया है। वर्तमान में आईआईटी कानपुर इस सॉफ्टवेयर का उपयोग एक शैक्षणिक उपकरण के रूप में कर रहा है। इसके माध्यम से सैद्धांतिक ज्ञान और वास्तविक फैब्रिकेशन वर्कफ्लो के बीच के अंतर को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्रों ने खुद किया सिमुलेशन
कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘हैंड्स-ऑन’ सत्र रहा। आईआईटी कानपुर, एचबीटीयू और अन्य प्रमुख संस्थानों के 120 से अधिक शोधकर्ताओं, संकायों और छात्रों ने मल्टी-फिजिक्स आधारित सॉफ्टवेयर सूट पर काम किया। प्रतिभागियों ने निम्नलिखित तकनीकी प्रक्रियाओं का सिमुलेशन किया।
थर्मल केमिकल वेपर डिपोजिशन (CVD)प्लाज़्मा एन्हांस्ड केमिकल वेपर डिपोजिशन (PECVD)एचिंग (Etching) प्रक्रियाएं
विशेषज्ञों का संबोधन
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कौशल विकास समय की मांग है। उन्होंने एप्लाइड मैटेरियल्स और संस्थान के इस साझा प्रयास की सराहना की। ACMS के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिश उपाध्याय ने “लर्निंग बाय डूइंग” (करके सीखना) के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, प्रो. मोनिका कटियार और प्रो. अंशु गौड़ ने चिप निर्माण में प्लाज़्मा की भूमिका पर तकनीकी व्याख्यान दिए। इस अवसर पर प्रो. तरुण गुप्ता (डीन, आर एंड डी), प्रो. कांतेश बलानी (विभागाध्यक्ष, एमएसई) सहित कई वरिष्ठ संकाय सदस्य उपस्थित रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से भारतीय छात्र वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकेंगे।
तकनीक की बारीकी : क्या है ‘डिजिटल ट्विन’ तकनीक?
डिजिटल ट्विन (AppliedTwin™) एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक है, जिसमें किसी भौतिक मशीन या प्रक्रिया का एक ‘डिजिटल क्लोन’ (आभासी प्रतिरूप) तैयार किया जाता है। सेमीकंडक्टर निर्माण में इसका लाभ यह है कि वैज्ञानिक बिना करोड़ों की मशीन को छुए या कच्चा माल बर्बाद किए, कंप्यूटर पर ही यह देख सकते हैं कि तापमान या दबाव बदलने पर चिप की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ेगा। इससे शोध में समय और पैसा दोनों बचते हैं।
भविष्य की राह – कौशल विकास से खुलेगा रोजगार का द्वार
आईआईटी कानपुर और एप्लाइड मैटेरियल्स का यह साझा प्रयास सीधे तौर पर भारत सरकार के ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) को मजबूती देता है। कार्यशाला में शामिल 120 से अधिक छात्र अब उन टूल्स पर प्रशिक्षित हैं, जो वैश्विक स्तर पर इंटेल, टीएसएमसी और सैमसंग जैसी दिग्गज कंपनियों में इस्तेमाल होते हैं। यह प्रशिक्षण छात्रों के लिए हाई-टेक इंडस्ट्री में रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगा।
विशेष कॉलम: ‘विशेषज्ञ की राय'”सेमीकंडक्टर निर्माण के सैद्धांतिक पहलुओं और वास्तविक वर्कफ्लो के बीच की दूरी को कम करने के लिए वर्चुअलाइजेशन सबसे प्रभावी तरीका है।”— प्रो. अनिश उपाध्याय, विभागाध्यक्ष, ACMS.






