G-INews, KANPUR। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) ने 9 फरवरी 2026 को अपना स्थापना दिवस बड़े ही धूमधाम और गौरव के साथ मनाया। रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की 60 वर्षों की विकास यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य के रोडमैप पर चर्चा की गई।
”कानपुर यूनिवर्सिटी का छात्र होना गर्व की बात” – डॉ. प्रदीप कुमार जोशी
समारोह के मुख्य अतिथि और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के चेयरमैन डॉ. प्रदीप कुमार जोशी (जो स्वयं इसी विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं) ने भावुक होते हुए कहा, “दुनिया आपको आपके पद से जानती है, लेकिन आपकी पहचान आपके संस्थान से होती है। खुद को कानपुर यूनिवर्सिटी का छात्र कहना मेरे लिए गर्व की बात है।” उन्होंने परिसर में निर्मित नए आधुनिक भवनों, हेलिपैड और स्टेडियम की सराहना करते हुए इसे कुलपति और शिक्षकों के समर्पण का परिणाम बताया।
पूर्व छात्र ही विश्वविद्यालय की असली पूंजी: कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठकविश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने पूर्व छात्रों (Alumni) के महत्व पर जोर देते हुए कहा:”किसी भी संस्थान की प्रतिष्ठा उसके पूर्व छात्रों की सफलता से मापी जाती है। जितने सक्षम हमारे एल्युमिनाई होंगे, उतना ही हमारा विश्वविद्यालय मजबूत होगा।”उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की कविता ‘हार नहीं मानूंगा’ के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन के अटूट संकल्प को दोहराया।
सीएसजेएमयू की विकास यात्रा: एक नजर मेंप्रतिकुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने संस्थान के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे सर्वोदय नगर के महज दो कमरों से शुरू हुआ यह सफर आज अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग और उत्कृष्ट शैक्षणिक गुणवत्ता तक पहुँच चुका है।

अनुभवों से सजी शाम और सांस्कृतिक उत्सव
स्थापना दिवस के अवसर पर शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा और लेखा जैसे क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाले 12 पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अन्य मुख्य विशेषताएं रहीं:
- आध्यात्मिक शुरुआत: सुबह सुंदरकांड पाठ और हवन के साथ मंगल शुरुआत।
- प्रतिभा प्रोत्साहन: बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति का वितरण।
- सांस्कृतिक छटा: कथक और लोक संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह में कुलसचिव डॉ. राकेश कुमार मिश्रा, वित्त अधिकारी अशोक त्रिपाठी समेत सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे। यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि विश्वविद्यालय की भविष्य की दिशा तय करने वाला एक सशक्त मंच भी साबित हुआ।






