G-INews, New Delhi : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत बोर्ड परीक्षाओं के ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। 2026 से लागू होने वाले ये नियम छात्रों के तनाव को कम करने और रटने के बजाय सीखने की क्षमता (Competency-based learning) को परखने पर केंद्रित हैं।
1. साल में दो बार बोर्ड परीक्षा (केवल 10वीं के लिए)2026 से कक्षा 10वीं के छात्रों को साल में दो बार बोर्ड परीक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा।
मुख्य और सुधार परीक्षा : फरवरी के मध्य में आयोजित की जाएगी।सुधार परीक्षा (Improvement): यह दूसरी परीक्षा मई/जून में होगी।फायदा: छात्र दोनों में से जिस परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करेंगे, उसी स्कोर को फाइनल माना जाएगा। इससे छात्रों का तनाव कम होगा और उन्हें स्कोर सुधारने का एक और मौका मिलेगा।
2. 75% उपस्थिति (Attendance) अनिवार्य
बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि 10वीं और 12वीं की परीक्षा में बैठने के लिए 75% अटेंडेंस होना अनिवार्य है। कम उपस्थिति वाले छात्रों को रोल नंबर जारी नहीं किया जाएगा। इसे अब आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) से भी जोड़ा गया है, जिसका अर्थ है कि क्लास में नियमित रहना अब अंकों के लिए भी जरूरी है।
3. प्रश्न पत्र के पैटर्न में बड़ा बदलाव
(10वीं और 12वीं)रटने की आदत को खत्म करने के लिए प्रश्न पत्रों के स्वरूप को बदला गया है:योग्यता आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions): अब प्रश्न पत्र में 50% सवाल केस स्टडी, सोर्स आधारित और एप्लाइड नॉलेज पर होंगे।बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs): वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का वेटेज बढ़ाकर 20% कर दिया गया है।लघु/दीर्घ उत्तरीय प्रश्न: इनका हिस्सा घटाकर अब केवल 30% रह गया है।
4. 11वीं कक्षा के लिए नए नियम
प्रोविजनल एडमिशन: 10वीं की पहली (फरवरी) परीक्षा के अंकों के आधार पर छात्रों को 11वीं में प्रोविजनल एडमिशन मिल सकेगा।विषय चयन: 11वीं और 12वीं में छात्रों को अतिरिक्त स्किल-आधारित विषय चुनने की अधिक छूट दी गई है।
APAAR आईडी: भारतीय छात्रों के लिए अब ‘अपार’ (APAAR) आईडी अनिवार्य कर दी गई है, जो उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखेगी।
5. मूल्यांकन और प्रैक्टिकल
प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन के अंक अब स्कूल को उसी दिन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे जिस दिन परीक्षा आयोजित हुई है। यह व्यवस्था पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

CBSE द्वारा इन बड़े बदलावों को लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करना है। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. रटने की प्रवृत्ति (Rote Learning) को खत्म करना
पुराने पैटर्न में छात्र अक्सर विषयों को समझकर पढ़ने के बजाय रट लेते थे। नए बदलावों का उद्देश्य छात्रों की तार्किक क्षमता (Analytical Skills) को बढ़ाना है ताकि वे सीखी हुई जानकारी को वास्तविक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में उपयोग कर सकें।
2. परीक्षा के तनाव और फोबिया को कम करना
साल में एक बार होने वाली बोर्ड परीक्षा के कारण छात्रों पर बहुत अधिक मानसिक दबाव रहता था।दो परीक्षाओं का विकल्प: 10वीं के लिए साल में दो बार परीक्षा का विकल्प इसलिए दिया गया है ताकि अगर किसी कारणवश छात्र एक परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन न कर पाए, तो उसके पास खुद को सुधारने का तुरंत अवसर हो।
3. रट्टा-आधारित के बजाय ‘योग्यता-आधारित’ मूल्यांकन
बोर्ड अब केवल यह नहीं देखना चाहता कि छात्र ने कितना याद किया है, बल्कि यह देखना चाहता है कि उसे विषय की कितनी गहरी समझ (Conceptual Clarity) है। यही कारण है कि ‘Competency-Based Questions’ की संख्या बढ़ाई गई है।
4. समग्र विकास (Holistic Development)
75% अटेंडेंस का सख्त नियम इसलिए बनाया गया है ताकि छात्र केवल परीक्षा के समय ही सक्रिय न हों, बल्कि पूरे साल स्कूल की गतिविधियों, लैब वर्क और क्लासरूम चर्चाओं का हिस्सा बनें। इससे छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।
5. भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना
आजकल की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं (जैसे JEE, NEET, CUET) में सवाल रटे-रटाए नहीं आते। बोर्ड के पैटर्न को इन परीक्षाओं के अनुरूप बनाकर छात्रों को भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा रहा है।
अगला कदम: क्या आप जानना चाहेंगे कि इन बदलावों का आपके आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) या प्रैक्टिकल परीक्षाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
अगर हां तो कमेंट कर बताएं जिससे हम आपको अगली बार नई जानकारी दे सकें.- गुरुकुल






