शौकिया जाँच से खुला बड़ा शोध घोटाला
अमेरिकी कैंसर संस्थान ने चुकाए 15 मिलियन डॉलर
G-INews, Science Desk : वैज्ञानिक शोध की दुनिया में ईमानदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए एक ब्रिटिश वैज्ञानिक ने अपने खाली समय में की गई जाँच के दम पर अमेरिका के एक प्रमुख कैंसर अनुसंधान संस्थान को करोड़ों डॉलर का कानूनी समझौता करने पर मजबूर कर दिया। इस मामले में शोध धोखाधड़ी उजागर करने वाले वैज्ञानिक को लगभग £2 मिलियन (करीब 21 करोड़ रुपये) का इनाम मिला है।
ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड निवासी शोल्टो डेविड, जो सेल और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में पीएचडी हैं, ने सैकड़ों वैज्ञानिक शोध-पत्रों का विश्लेषण किया। इस दौरान उन्हें कई प्रकाशित रिसर्च पेपर्स में डेटा और चित्रों (इमेज) की हेराफेरी के गंभीर प्रमाण मिले।
क्या थी गड़बड़ी?
जाँच में सामने आया कि—अलग-अलग प्रयोगों के नाम पर एक ही माइक्रोस्कोपिक तस्वीरों का दोबारा इस्तेमाल किया गया। चूहों और मानव नमूनों की तस्वीरें भ्रामक तरीके से पेश की गईं। कुछ मामलों में परिणामों को मनचाहा दिखाने के लिए डेटा में काट-छांट की गईये सभी शोध अमेरिकी सरकारी अनुदान (फंडिंग) से जुड़े हुए थे।
कानूनी कार्रवाई और समझौता
डेविड ने अमेरिका के False Claims Act के तहत शिकायत दर्ज कराई। यह कानून सरकारी धन से जुड़ी धोखाधड़ी उजागर करने वालों को संरक्षण और इनाम देता है।मामले में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से संबद्ध डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट (Dana-Farber Cancer Institute) ने आरोप स्वीकार किए बिना $15 मिलियन (लगभग 125 करोड़ रुपये) का कानूनी समझौता किया।इस राशि में से एक हिस्सा अमेरिकी सरकार को लौटाया गया, जबकि शिकायतकर्ता डेविड को लगभग £2 मिलियन की पुरस्कार राशि दी गई।
शोध जगत पर असर
इस खुलासे के बाद—कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नलों ने शोध पत्र वापस (Retract) लिए। दर्जनों अध्ययनों में संशोधन किए गए। कैंसर रिसर्च की peer-review प्रक्रिया पर भी सवाल उठे
विशेषज्ञों का कहना है कि गलत शोध न केवल विज्ञान की साख को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इससे मरीजों के इलाज और दवाओं पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
क्या बोले शोल्टो डेविड?
डेविड ने कहा,“अधिकांश वैज्ञानिक ईमानदारी से काम करते हैं, लेकिन सिस्टम में खामियां हैं। हर प्रकाशित शोध सही हो, यह ज़रूरी नहीं। अगर कोई सवाल पूछे, तो सच सामने आ सकता है।”
क्यों अहम है यह मामला?
यह केस इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि—एक आम शोधकर्ता ने वैश्विक स्तर की संस्था की गड़बड़ी पकड़ी। वैज्ञानिक शोध में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत सामने आई। यह साबित हुआ कि सच्चाई उजागर करने वालों को कानून का संरक्षण मिलता है। निष्कर्ष:एक व्यक्ति की जिज्ञासा और ईमानदारी ने न सिर्फ करोड़ों की धोखाधड़ी उजागर की, बल्कि वैज्ञानिक शोध की विश्वसनीयता पर नई बहस भी छेड़ दी है।






