G-INews, New Delhi : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने भविष्य की नौकरियों का शिकार करना शुरू किया तो इससे निपटने के लिए छात्रों ने अब विषय परिवर्तन की रणनीति अपना ली है। छात्र अब उन विषयों का चयन कर रहे हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दायरे से बाहर है। अपने करियर को नई दिशा देने की कोशिश में जुटे छात्रों ने उन विषयों के अध्ययन को प्राथमिकता देनी शुरू कर दी है जहां अभी आने वाले कई दशक तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग टेक्नोलाजी का असर नहीं होगा।
अमेरिका में हाल ही में गैलप (Gallup) और लुमिना फाउंडेशन द्वारा लगभग 3,800 अमेरिकी छात्रों पर किए गए एक सर्वे से पता चला है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर अब छात्रों के करियर विकल्पों पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, हर छह में से एक छात्र (16%) ने जॉब मार्केट पर AI के प्रभाव को देखते हुए अपना मुख्य विषय (Major) बदल दिया है।सर्वे के मुख्य बिंदु:बदलाव पर विचार: लगभग 47% कॉलेज छात्रों ने AI के कारण अपने अध्ययन के क्षेत्र को बदलने पर गंभीरता से विचार किया।सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र: टेक्नोलॉजी और बिजनेस प्रोग्राम के छात्रों में बदलाव की संभावना सबसे अधिक (70%) देखी गई।सबसे कम प्रभावित क्षेत्र: स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) और प्राकृतिक विज्ञान (Natural Sciences) के छात्र AI के कारण अपने विषयों को बदलने के प्रति सबसे कम इच्छुक दिखे।तकनीकी क्षेत्र में दुविधा और बदलावलुमिना फाउंडेशन की डॉ. कोर्टनी ब्राउन के अनुसार, छात्र भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए खुद को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं।
टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दो तरह के रुझान दिख रहे हैं:अवसर: कुछ छात्र AI में बेहतर भविष्य देखकर इस ओर बढ़ रहे हैं। डर: कुछ छात्र नौकरियों के खत्म होने या व्यवधान (Disruption) की चिंता में इस क्षेत्र को छोड़ रहे हैं।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक प्रोग्रामिंग में छात्रों की रुचि 2020 के 14% से घटकर 2026 तक 10% रहने का अनुमान है। इसके विपरीत, AI विकास और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में छात्रों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। मानविकी (Humanities) और सामाजिक विज्ञान की स्थितिरिपोर्ट में पाया गया कि सामाजिक विज्ञान और मानविकी के छात्रों में विषय बदलने की संभावना कम रही। हालांकि, कई विश्वविद्यालय अब अपने ‘लिबरल आर्ट्स’ पाठ्यक्रम में AI को शामिल कर रहे हैं ताकि छात्र भविष्य की जरूरतों के अनुसार मानवीय कौशल और तकनीक का तालमेल बिठा सकें।
डिग्री बनाम कौशल (Skills)जहाँ एक ओर करियर चुनना जटिल होता जा रहा है, वहीं भर्ती के तरीकों में भी बदलाव आ रहा है।
हायरव्यू (HireVue) की 2026 की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार:भले ही 79% शुरुआती नौकरियों के लिए डिग्री अनिवार्य है, लेकिन 70% नियोक्ता अब ‘कौशल-आधारित भर्ती’ (Skill-based hiring) को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अमेरिका के लगभग 25% संगठनों ने योग्य उम्मीदवारों का दायरा बढ़ाने के लिए डिग्री की शर्तों में ढील देने पर विचार करना शुरू कर दिया है।निष्कर्ष:विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों का सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और AI-केंद्रित क्षेत्रों की ओर बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि युवा पीढ़ी भविष्य के कार्यबल (Workforce) की बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को ढालने के लिए तैयार है।






