G-INews, New Delhi : – भारत अपनी पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रहा है। शहरों में जहरीली हवा की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग से लेकर गंगा के मैदानी इलाकों में पीने के पानी में आर्सेनिक (Arsenic) का पता लगाने तक, AI अब एक रक्षक की भूमिका निभा रहा है। आईआईटी कानपुर और आईआईटी खड़गपुर के हालिया शोध इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
1. स्मार्ट शहरों के लिए रीयल-टाइम एयर मॉनिटरिंग
आईआईटी कानपुर के AIRAWAT रिसर्च फाउंडेशन ने आईआईटी दिल्ली के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य शहरों को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है।
AI सेंसर सिस्टम: शोधकर्ता ऐसे AI-इनेबल्ड सेंसर विकसित कर रहे हैं जो हवा की गुणवत्ता और ‘बायोएरोसोल’ (Bioaerosols) की रीयल-टाइम निगरानी करेंगे।
क्लाइमेट रेजिलिएंट शहर: डेटा का विश्लेषण कर यह तकनीक कचरा प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता और शहरी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में मदद करेगी।

2. पीने के पानी से आर्सेनिक का खात्मा
आईआईटी खड़गपुर के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा AI प्रेडिक्शन मॉडल विकसित किया है जो जमीन के नीचे छिपे आर्सेनिक प्रदूषण की सटीक पहचान कर सकता है। यह तकनीक विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और गंगा के किनारे बसे उन क्षेत्रों के लिए वरदान है जहाँ करोड़ों लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
सटीक मैपिंग: AI एल्गोरिदम के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि किन क्षेत्रों में आर्सेनिक का स्तर अधिक है।
जल जीवन मिशन को मजबूती: यह मॉडल सरकार के ‘जल जीवन मिशन’ में मदद कर रहा है, जिससे सुरक्षित जल स्रोतों का चयन करना आसान हो गया है।
निष्कर्ष: AI तकनीक न केवल पर्यावरण की रक्षा कर रही है, बल्कि भारत के भविष्य को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ी क्रांति लेकर आई है.AI Revolutionizes India’s Environmental Protection: A New Era for Air and Water Safety
Wadhwani School of Artificial Intelligence & Intelligent Systems-IIT Kanpur






