डिजिटल एडिक्शन युवाओं के लिए बड़ा खतरा : IQ नहीं अब काबिलियत का नया पैमाना होगा ‘DQ’,

DM जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया सफलता का मंत्र

G-INews, KANPUR : छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में आयोजित ‘फाइटिंग डिजिटल एडिक्शन’ कार्यक्रम में तकनीक के बढ़ते दुष्प्रभावों और इसके संतुलित उपयोग पर गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, कानपुर के जिलाधिकारी (DM) जितेंद्र प्रताप सिंह ने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि मोबाइल की लत एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में सफलता के लिए DQ (डिजिटल क्वोशेन्ट) ही काबिलियत का प्रमुख मानक बनेगा।

IQ और EQ के बाद अब ‘DQ’ का दौर

​डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बौद्धिक विकास के क्रमिक बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि 20वीं सदी में IQ (इंटेलिजेंस क्वोशेन्ट) और 21वीं सदी की शुरुआत में EQ (इमोशनल क्वोशेन्ट) को महत्व दिया गया। लेकिन आज के डिजिटल युग में DQ (Digital Quotient) सबसे महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति की वह क्षमता है जिससे वह यह तय करता है कि तकनीक का उपयोग उसे करना है या तकनीक उसे नियंत्रित करेगी।

अटेंशन इकॉनमी और डोपामिन का खेल

​जिलाधिकारी ने तकनीक के पीछे के मनोविज्ञान को समझाते हुए बताया कि आज हम ‘अटेंशन इकॉनमी’ के दौर में हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कसीनो की स्लॉट मशीनों (इंटरमिटेंट रिइन्फोर्समेंट) की तर्ज पर डिजाइन किया गया है।

  • वैज्ञानिक संदर्भ: उन्होंने 1954 के मैकगिल विश्वविद्यालय के प्रयोग का उदाहरण दिया, जिसमें डोपामिन रिलीज होने पर एक चूहा भोजन छोड़कर बार-बार बटन दबाता रहा।
  • प्रभाव: आज के युवा भी इसी डोपामिन लूप में फंसकर बार-बार नोटिफिकेशन चेक करते हैं, जिससे उनकी उत्पादकता शून्य हो रही है।

सफलता के लिए ‘डिजिटल उपवास’ जरूरी

​डीएम ने सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) के टॉपर्स और बैडमिंटन स्टार पी.वी. सिंधु का उदाहरण देते हुए बताया कि अनुशासन ही उत्कृष्टता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि पुल्लेला गोपीचंद की अकादमी में खिलाड़ियों के फोन सुबह जमा करा लिए जाते हैं। युवाओं को तकनीक से दूर भागने के बजाय डिजिटल अनुशासन अपनाने की जरूरत है।

छात्रों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह

विशेषज्ञों की चेतावनी: 51% कॉलेज छात्र जोखिम में

​क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट सृजन श्रीवास्तव और डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि भारत में लगभग 20 से 40 प्रतिशत युवा इंटरनेट एडिक्शन के शिकार हैं, जबकि कुछ कॉलेजों में यह आंकड़ा 51 प्रतिशत तक है। इससे निपटने के लिए विश्वविद्यालय एक तीन स्तरीय हस्तक्षेप मॉडल (Three-tier Intervention Model) लागू करेगा, जिसमें छात्र, शिक्षक और अभिभावक मिलकर काम करेंगे।

[विशेष बॉक्स] क्या आप भी हैं डिजिटल लत के शिकार? पहचानें ये 10 संकेत:

  1. ​बिना किसी काम के बार-बार मोबाइल नोटिफिकेशन चेक करना।
  2. ​5 मिनट के लिए फोन उठाकर घंटों सोशल मीडिया पर बिताना।
  3. ​पढ़ाई या जरूरी काम के दौरान फोकस न कर पाना।
  4. ​फोन पास न होने पर घबराहट या चिड़चिड़ापन (Nomophobia)।
  5. ​देर रात तक स्क्रीन देखने के कारण नींद न आना (Insomnia)।
  6. ​परिवार और दोस्तों के साथ होने पर भी फोन में डूबे रहना।
  7. ​आंखों में सूखापन, सिरदर्द और गर्दन में दर्द (Tech Neck)।
  8. ​सोशल मीडिया पर दूसरों की लाइफ देखकर हीन भावना आना।
  9. ​अपनी पुरानी हॉबीज या ऑफलाइन खेलों में रुचि खत्म होना।
  10. ​मोबाइल छोड़ने की बार-बार कोशिश के बावजूद नाकाम रहना।

कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति

​इस संवाद में डॉ. संदीप सिंह, पारुल राजोरिया, डॉ. अनमोल श्रीवास्तव, दुर्गा यादव, अहमद अब्दुल्ला और आशीका मिश्रा सहित कई मनोवैज्ञानिक और शिक्षाविद् मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में डिजिटल डिटॉक्स और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

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