G-INews ,Lucknow : सरकार ने अपनी शिक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से 29,000 से अधिक बोर्ड-संबंधित स्कूलों में लगभग 60,000 अनुदेशक (Instructor) के पदों पर भर्ती की तैयारी तेज कर दी है। ये भर्ती आने वाले शैक्षणिक सत्र 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से लागू) से लागू होने वाली है और इस खबर को अब सुप्रीम कोर्ट के हालिया सैलरी-आदेश ने और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अनुदेशक की सैलरी और नौकरी की सुरक्षासुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के उन संविदा-आधारित अनुदेशकों/शिक्षकों को बड़ा न्यायिक आदेश दिया है जो पिछले कई वर्षों से कम मानदेय पर सेवा दे रहे हैं:
मुख्य आदेश – सैलरी और रोजगार की सुरक्षाअनुदेशकों को अब ₹17,000 मासिक मानदेय मिलेगा:कोर्ट ने आदेश दिया है कि उन पार्ट-टाइम/संविदा अनुदेशकों को ₹17,000 प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। यह आदेश 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना गया है।
पूर्व बकाया (Arrears) भुगतान:सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो बकाया राशि ₹7,000 के बजाय ₹17,000 के अनुसार लंबित है, उसे छह महीनों के भीतर पूरा भुगतान किया जाना चाहिए।
नौकरी खत्म नहीं होगी:कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुदेशक का कार्य लगातार 10 साल से अधिक जारी रहने के कारण उनकी नियुक्ति केवल संविदात्मक नहीं मानी जाएगी और वे “परमानेंट (स्थायी)” मानदेन के काबिल हैं।
मानदेय में नियमित संशोधन:कोर्ट ने यह भी कहा है कि लंबे समय तक वही पुराना मानदेय रोकना “अनुचित श्रमिक व्यवहार” (forced labour) जैसा है और मानदेय को समय-समय पर संशोधित करना आवश्यक है। भर्ती पर प्रभाव: सैलरी आदेश से क्या बदल गया?
भर्ती की महत्ता बढ़ी
अनुदेशक भर्ती पहले से ही शिक्षा के विस्तार और कौशल-आधारित शिक्षण को मजबूत करने के लिए उठाया गया कदम है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसका आर्थिक पक्ष भी मजबूत हुआ है: अनुदेशक के पदों को अब व्यवस्थित और सम्मानजनक वेतन मिलेगा। जो लोग नौकरी पाने की उम्मीद कर रहे हैं, उन्हें मानदेय और भविष्य सुरक्षा के साथ मौका मिलेगा। भर्ती में अब योग्यता के साथ मानदेय नीति भी न्यायोचित तरीके से लागू होगी।
सरकार को अब क्या करना होगा?सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार:1 अप्रैल 2026 से ₹17,000 सैलरी लागू करना। बकाया भुगतान छह महीनों के भीतर सुनिश्चित करना। भर्ती प्रक्रिया में नए मानदेय की घोषणा और भर्ती विज्ञप्ति में इसे शामिल करना।भर्ती में योग्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता देना ताकि शिक्षा विभाग की शैक्षिक गुणवत्ता बेहतर हो.
विश्लेषण: सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और शिक्षा नीति पर असरसुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट संदेश भेजा है कि शिक्षा विभाग और राज्य सरकारें शिक्षकों/अनुदेशकों के अधिकारों का सम्मान करें। न्यूनतम वेतन और रोजगार सुरक्षा शिक्षा की गुणवत्ता के लिए आवश्यक हैं।न्यायालय ने यह देखा कि लंबे समय से कम वेतन पर काम करना “forced labour” जैसा व्यवहार बन रहा था, जो संविधान के खिलाफ है।
प्रदेश में अनुदेशक भर्ती की खबर अब सिर्फ एक नई भर्ती योजना नहीं रह गई है — यह भर्ती प्रक्रिया को बेहतर नियम, सैलरी अधिकार और रोजगार सुरक्षा से जोड़ती हुई एक ऐतिहासिक सामाजिक-न्याय घटना का हिस्सा बन गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अनुदेशक की नौकरी सुरक्षित, वेतन सम्मानजनक और भविष्य में वेतन संशोधन सुनिश्चित होने से यह भर्ती योजना शिक्षण व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
भर्ती क्यों और क्या बदलाव लाया जा रहा है?
राज्य सरकार का उद्देश्य शिक्षा को और अधिक व्यावसायिक और कौशल-आधारित बनाना है। इसके लिए कक्षा 9 और 11 में व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य कर दी गई है। इसी वजह से प्रत्येक बोर्ड-संबंधित स्कूल में अतिरिक्त शिक्षण सहायता की आवश्यकता पड़ी है। इसी कड़ी में लगभग 60,000 अनुदेशक पदों (Instructors) की भर्ती की तैयारी की जा रही है, ताकि प्रत्येक स्कूल में औद्योगिक, तकनीकी या व्यावसायिक पाठ्यक्रम कुशलतापूर्वक संचालित किए जा सकें।
योग्यता एवं पात्रता:अनुदेशक के रूप में नियुक्ति के लिए आमतौर पर स्नातक डिग्री तथा संबंधित ट्रेड/विषय में योग्यता आवश्यक मानी जाती है। इसके अलावा तकनीकी विषय में डिप्लोमा/प्रशिक्षण भी शामिल हो सकता है, लेकिन अधिकारिक पैमाने अभी जारी होना बाकी है। अनुदेशक विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा के विभिन्न कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों (जैसे कंप्यूटर, टेक्नोलॉजी, वाणिज्य, तकनीकी विषय) पढ़ाएंगे, जिससे शिक्षा और रोजगार क्षमता में सुधार होगा।
आगे की प्रक्रियाआधिकारिक भर्ती विज्ञप्ति जारी होने के बाद आवेदन तिथि, पात्रता मानदंड, चयन प्रक्रिया और परीक्षा-निर्धारित तिथियाँ शिक्षा विभाग की वेबसाइट या सरकारी अधिसूचनाओं के माध्यम से जारी की जाएँगी।उम्मीद है कि आगामी महीनों में यूपी सरकार या सम्बन्धित आयोग (जैसे Basic Education Dept./UP Board/UPSSSC) इसकी आधिकारिक घोषणा करेगा।
यह नियुक्ति योजना उत्तर प्रदेश में शिक्षा के स्वरूप को और आधुनिक, व्यावसायिक और छात्रों के भविष्य-लक्ष्य के अनुरूप बनाने का एक बड़ा कदम है। इसके तहत अनुदेशक पदों की भर्ती से न केवल व्यावसायिक शिक्षा मजबूत होगी बल्कि छात्रों को रोजगार-उन्मुख कौशल भी मिलेगा।






