G-INews , KANPUR : राष्ट्र निर्माण की दिशा में सिविल इंजीनियरिंग के महत्व को रेखांकित करने और उद्योग-अकादमी के बीच की दूरी को पाटने के उद्देश्य से आईआईटी कानपुर में तीन दिवसीय ‘बिल्डिंग भारत संपर्क इनोवेशन बूट कैंप’ का सफल आयोजन किया गया। यह इस श्रृंखला का दूसरा अध्याय था, जिसका नेतृत्व एसोसिएशन ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री (भारत) ने जेएसडब्ल्यू (JSW) ग्रुप की साझेदारी में किया।
नवाचार और समावेशिता का संगम
इस बूट कैंप में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए 300 से अधिक सिविल इंजीनियरिंग छात्रों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण महिला छात्रों की सक्रिय भागीदारी रही, जो बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक समावेशी भविष्य का संकेत है।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:
हैकथॉन और स्टार्टअप प्रतियोगिता: छात्रों को वास्तविक बुनियादी ढांचा चुनौतियों के समाधान के लिए प्रोटोटाइप तैयार करने का मौका मिला।
मेंटरशिप: वरिष्ठ उद्योग विशेषज्ञों ने छात्रों को समस्या की पहचान और व्यावहारिक समाधानों पर मार्गदर्शन दिया।
मंथन मंच का समर्थन: भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय द्वारा इसे समर्थन प्राप्त हुआ।
दिग्गजों के विचार
प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल (निदेशक, आईआईटी कानपुर):
”सिविल इंजीनियरिंग राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। भविष्य के इंजीनियरों के लिए कक्षा की सीमाओं से बाहर निकलकर अनुभव करना आवश्यक है। हमें गर्व है कि हमने इस मंच की मेजबानी की जो छात्रों और उद्योग के बीच सार्थक सहभागिता स्थापित करता है।”
निलेश नारवेकर (CEO, जेएसडब्ल्यू सीमेंट):
” ‘विकसित भारत’ की नींव केवल मजबूत सामग्रियों में नहीं, बल्कि नवाचारी दिमागों में निहित है। जेएसडब्ल्यू में हमारा मानना है कि सतत अवसंरचना के लिए नवाचार को निष्पादन से जोड़ना अनिवार्य है।”
डॉ. राजनीश दासगुप्ता (नेशनल डायरेक्टर, बिल्डिंग भारत संपर्क):
उन्होंने इसे एक “राष्ट्रीय क्रांति” करार देते हुए कहा कि यह पहल केवल एक आयोजन नहीं बल्कि एक सतत मंच है जो युवा इंजीनियरों में जिम्मेदारी की भावना पैदा करता है।
भविष्य की योजनाएं
आईआईटी गांधीनगर और अब आईआईटी कानपुर में मिली सफलता के बाद, इस अभियान का अगला पड़ाव दक्षिण भारत की ओर होगा। एसोसिएशन ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री (भारत) ने घोषणा की है कि बिल्डिंग भारत संपर्क का अगला संस्करण अप्रैल 2026 में आईआईटी मद्रास में आयोजित किया जाएगा।
यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि जब शैक्षणिक संस्थान और औद्योगिक दिग्गज एक साथ आते हैं, तो भविष्य के ‘विकसित भारत’ का खाका और भी मजबूत हो जाता है






