पूर्वोत्तर के छात्रों के सैटेलाइट ‘LACHIT-1’ का ISRO के PSLV-C62 से सफल प्रक्षेपण

G-INews, KANPUR 12 जनवरी 2026: पूर्वोत्तर भारत के शिक्षा और अंतरिक्ष इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी (ADBU) द्वारा निर्मित पूर्वोत्तर का पहला नैनो-सैटेलाइट, LACHIT-1, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के PSLV-C62 रॉकेट के माध्यम से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।​ इसे पूर्वोत्तर के पांच राज्यों के 50 से अधिक छात्रों और फैकल्टी ने मिलकर तैयार किया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र की वैज्ञानिक प्रगति का एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों और वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि यह मिशन पूर्वोत्तर की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षमता का एक जीता-जागता उदाहरण है।​

सहयोग और नवाचार की मिसाल​LACHIT-1 केवल एक विश्वविद्यालय का प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह पूरे पूर्वोत्तर के सहयोग का परिणाम है। ​ इसे हैदराबाद स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप ‘ध्रुव स्पेस’ (Dhruva Space) के पोलर एक्सेस-1 (Polar Access-1) कार्यक्रम के तहत बनाया गया है।​

भागीदारी: इसमें पूर्वोत्तर के पांच अलग-अलग राज्यों के 50 से अधिक छात्रों और शिक्षकों ने अपनी विशेषज्ञता साझा की है।​तकनीक: यह सैटेलाइट मुख्य रूप से ‘स्टोर-एंड-फॉरवर्ड’ (Store-and-Forward) संचार प्रणाली पर आधारित है, जो कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में डेटा ट्रांसमिशन के लिए एक व्यावहारिक नवाचार है।

​क्यों खास है LACHIT-1?​इस सैटेलाइट का नाम महान अहोम सेनापति लचित बोरफुकन के सम्मान में रखा गया है। यह मिशन न केवल तकनीकी परीक्षण के लिए है, बल्कि इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर के युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना और जटिल इंजीनियरिंग समस्याओं को हल करने का आत्मविश्वास देना है।​

​प्रमुख बिंदु एक नज़र में:​सैटेलाइट का नाम: LACHIT-1​संस्थान: असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी (ADBU)​लॉन्च वाहन: ISRO PSLV-C62​मुख्य उद्देश्य: स्टोर-एंड-फॉरवर्ड संचार और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण।​महत्व: पूर्वोत्तर भारत से अंतरिक्ष में भेजा जाने वाला पहला उपग्रह।​

फैक्ट-चेक: LACHIT-1 पूर्वोत्तर भारत का पहला सैटेलाइट है जिसे असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी ने विकसित किया है। यह सैटेलाइट ‘ध्रुव स्पेस’ के ‘पोलर एक्सेस-1’ प्रोग्राम के तहत विकसित किया गया है।​

प्रक्षेपण (Launch): इसे आज, 12 जनवरी 2026 को ISRO के PSLV-C62 मिशन के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया है।​

सहयोग: इसमें 5 पूर्वोत्तर राज्यों के 50 से अधिक छात्रों और फैकल्टी का योगदान है।

Related Posts

Claude Opus ने क्रोम ब्राउजर में सेंध लगाकर उड़ाए सबके होश : क्या AI बन रहा है साइबर सुरक्षा के लिए नया खतरा?

​​ G-INews,KANPUR : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अब तक सबसे बड़ी चर्चा नौकरियों के जाने पर होती रही है, लेकिन हाल ही में सामने आए एक मामले ने तकनीकी…

CSJMU News: विज्ञापन और जनसंपर्क में AI का कमाल, जेएनयू के प्रो. रवीन्द्र नाथ ने बताए सफलता के मंत्र

​ ​G-INews कानपुर, 18 अप्रैल 2026: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा शनिवार को एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘विज्ञापन एवं जनसंपर्क…