‘आसमानी’ उद्यमी: कबाड़ के गत्तों से शुरू हुआ सफर, अब सेना को ड्रोन सप्लाई कर रहा यह छात्र

G-INews, KANPUR : कहते हैं कि प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, और इस बात को सच कर दिखाया है लुधियाना के रहने वाले युवा छात्र तनिष ने। कभी गत्ते के डिब्बों से खिलौना हवाई जहाज बनाने वाले तनिष आज अपनी खुद की कंपनी ‘शील्ड डायनेमिक्स’ (Shield Dynamics) के जरिए भारतीय सेना को अत्याधुनिक ड्रोन और मानवरहित विमान (UAVs) सप्लाई कर रहे हैं।

आईआईटी कानपुर के वार्षिक आयोजन टेककृति के एरो मॉडल कंपटीशन में प्रथम आने वाले के दौरान तनिष ने अपने इस प्रेरणादायक सफर की यादें साझा कीं। ​छठी क्लास से शुरू हुआ ‘उड़ने’ का जुनून

​तनिष ने बताया कि बचपन में उन्हें खिलौने और मोटर खोलकर देखने का शौक था। छठी कक्षा में उन्होंने गत्ते के बॉक्स काटकर अपना पहला विमान बनाया। हालांकि, शुरुआती 6-7 प्रयास असफल रहे क्योंकि उन्हें ‘एयरोडायनामिक्स’ और ‘सेंटर ऑफ ग्रेविटी’ जैसे तकनीकी नियमों का पता नहीं था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इंटरनेट व यूट्यूब के जरिए खुद को शिक्षित किया। धीरे-धीरे उनके बनाए मॉडल आसमान छूने लगे।​

अपने एरोमॉडल के साथ तनिष

11वीं में खड़ी कर दी खुद की कंपनी

​तनिष की प्रतिभा को देखते हुए उन्हें 10वीं कक्षा में ही सेना से संपर्क प्राप्त हुआ, जहां विमानों की जरूरत थी। इसके बाद उन्होंने 11वीं कक्षा में अपनी प्रोप्राइटरशिप कंपनी ‘शील्ड डायनेमिक्स’ की शुरुआत की। आज उनका टर्नओवर 10 से 15 लाख रुपये महीना तक पहुँच गया है। उनके इस सफर में उनके पिता (जो वेटनरी क्षेत्र से हैं) का पूरा सहयोग रहा, जिन्होंने तनिष को घर की छत पर ही एक आधुनिक लैब बनाकर दी है।​

स्वदेशी ‘कामीकाजे’ और स्वाम ड्रोन तकनीक

​तनिष वर्तमान में ‘कामीकाजे’ (Kamikaze) यानी सुसाइड ड्रोन और ‘स्वाम’ (Swarm) ड्रोन तकनीक पर काम कर रहे हैं। ​स्वाम तकनीक में एक ही रिमोट से 10 से 20 जहाज एक साथ उड़ाए जा सकते हैं।​

ऑटोनॉमस नेविगेशन: उनके ड्रोन मैप और लोकेशन की मदद से खुद ही उड़ान भरकर लक्ष्य तक पहुँचने और लैंड करने में सक्षम हैं।

​नवाचार का मंत्र: थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल भी​भविष्य के नन्हे वैज्ञानिकों को सलाह देते हुए तनिष कहते हैं कि सिर्फ किताबी ज्ञान काफी नहीं है। उन्होंने बताया कि असली विमानों की तरह उनके आरसी (RC) प्लेन भी हवा के विपरीत दिशा (Against the wind) में टेक-ऑफ करते हैं ताकि विंग्स को बेहतर लिफ्ट मिल सके। वे आज भी थर्माकोल और कार्डबोर्ड जैसे सुलभ सामानों का उपयोग कर बेहतरीन मॉडल तैयार करते हैं।​

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