G-INews, KANPUR, 3 मार्च 2026 : खगोल विज्ञान (Astronomy) में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए मंगलवार तीन मार्च एक ऐतिहासिक दिन रहा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के एस्ट्रोनॉमी क्लब (IIT Kanpur Astronomy Club) ने साल के पहले चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2026) का लाइव अवलोकन करने के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया।

तकनीक का इस्तेमाल: 100mm टेलीस्कोप से कैप्चर किए पल
संस्थान के भौतिक विज्ञान विभाग (IIT Kanpur Physics Department) के छात्र व एस्ट्रोनामी क्लब (IIT Kanpur Astronomy Club) के कोआर्डिनेटर देवांश कार्तिक ने बताया कि (Year’s first Chandra Grahan) ग्रहण की हर हलचल को रिकॉर्ड करने के लिए सुबह से ही कैंपस में प्रबंध किए गए थे। इसके तहत 100 mm के हाई-पावर टेलीस्कोप (100mm telescope) और बाइनोकुलर को संस्थान की ऊंची बिल्डिंग की छत पर लगाया गया था। एस्ट्रोनामी (Astronomy students) छात्रों ने न केवल अपनी आंखों से इस घटना को देखा, बल्कि प्रोफेशनल कैमरों की मदद से ग्रहण के बदलते चरणों (Phases) की फोटोग्राफी भी की।

क्या रहा खास?
बड़ा और चमकीला चांद: सामान्य पूर्णिमा की तुलना में इस मंगलवार को चंद्रमा का आकार काफी बड़ा और गहरा दिखाई दिया। संस्थान के एयरोस्पेस विभाग के छात्र और एस्ट्रोनामी क्लब के (Aerospace dept. Secretary and Astronomy club) के सचिव प्रीत वारू ( Preet Varu) ने स्पष्ट किया कि भारत की भौगोलिक स्थिति (Indian Range) के कारण ग्रहण के शुरुआती चरण नहीं देखे जा सके, लेकिन जैसे ही चंद्रमा क्षितिज पर आया, छात्रों ने इसकी संरचना और छाया के प्रभाव का गहन अध्ययन किया।

Blood Moon का अनुभव: ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग हल्का तांबई (Coppery-Red) दिखाई दिया, जिसे विशेषज्ञों ने ‘ब्लड मून’ की संज्ञा दी।IIT-Kanpur-launches-online-course-on-Python-programming-346860988.jpg

सभी संस्थानों में हो खगोलीय आयोजन: क्लब सदस्य प्रीत वारू ने अपील की कि विज्ञान को केवल किताबों तक सीमित न रखकर इस तरह के व्यावहारिक आयोजन सभी स्कूलों और कॉलेजों में होने चाहिए। इससे छात्रों में स्टेम (STEM) शिक्षा और अंतरिक्ष विज्ञान (Space science education) के प्रति जिज्ञासा बढ़ती है। खगोल विज्ञान की शुरुआत ही इसी तरह के अवलोकन और पर्यवेक्षण से हुई है। हमारे देश के आर्यभट्ट (Arya Bhatt)जैसे खगोलशास्त्री रात- रात भर जागकर तारों को देखते रहते थे।

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