G-INews, KANPUR : शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (PSIT) ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और AICTE के दिशा-निर्देशों के तहत संस्थान को ‘एकेडमिक स्वायत्तता’ (Academic Autonomy) की स्वीकृति मिल गई है।यह दर्जा मिलने के बाद अब पीएसआईटी एक स्वतंत्र शैक्षणिक इकाई के रूप में कार्य कर सकेगा, जिससे यहाँ पढ़ रहे हजारों छात्रों के लिए वैश्विक स्तर की शिक्षा और करियर के नए द्वार खुलेंगे।
शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव :अकादमिक स्वायत्तता मिलने से संस्थान के पास अब अपनी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के व्यापक अधिकार होंगे:स्वयं का पाठ्यक्रम: पीएसआईटी अब पारंपरिक ढर्रे से हटकर उद्योग (Industry) की जरूरतों के अनुसार अपना सिलेबस खुद तैयार और अपडेट कर सकेगा।स्वतंत्र परीक्षा प्रणाली: परीक्षाओं के आयोजन और मूल्यांकन की प्रक्रिया अब संस्थान स्तर पर अधिक पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संचालित होगी।भविष्य की तकनीकें: पाठ्यक्रम में अब जेनेरेटिव एआई (Gen-AI), एजेनटिक आई, क्वांटम कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग जैसे उभरते विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी।छात्रों को मिलेगा ‘इंडस्ट्री-रेडी’ एक्सपोजर : स्वायत्तता का सीधा लाभ छात्रों की रोजगार क्षमता (Employability) पर पड़ेगा। रटने वाली पद्धति के बजाय अब मूल्यांकन प्रोजेक्ट वर्क, रिसर्च, इंटर्नशिप और इनोवेशन पर आधारित होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप, छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषय चुन सकेंगे, जिससे उनके भीतर ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ और ‘प्रॉब्लम सॉल्विंग’ स्किल्स विकसित होंगी।
संस्थान के नेतृत्व का दृष्टिकोण

”एकेडमिक स्वायत्तता पीएसआईटी के छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा, बेहतर स्किल और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायक बनेगा।”— प्रणवीर सिंह, चेयरमैन, पीएसआईटी

“अब हम शिक्षा को अधिक प्रैक्टिकल, फ्लेक्सिबल और इंडस्ट्री ओरिएंटेड बना पाएंगे। स्वायत्तता से हमें सिलेबस को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तेजी से अपडेट करने की शक्ति मिली है।”— डॉ. मनमोहन शुक्ला, ग्रुप निदेशक, पीएसआईटी






