G-INews, New Delhi : भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) के तहत प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) ने देश भर के आईटीआई (ITI) संस्थानों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के मुताबिक, अब क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम (CTS) के तहत पढ़ाई कर रहे सभी छात्रों को 150 घंटे की अनिवार्य ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) या ग्रुप प्रोजेक्ट करना होगा। यह नियम शैक्षणिक सत्र 2022-23 से ही प्रभावी कर दिया गया है।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
पुराने सिस्टम में देखा गया था कि छात्र अक्सर कैंपस में मौजूद पुरानी मशीनों और टूल्स पर ही अभ्यास करते थे। इससे उन्हें आधुनिक इंडस्ट्री की बदलती तकनीक का अनुभव नहीं मिल पाता था, जिसके कारण नौकरी मिलने के बाद उन्हें दोबारा ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती थी।
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के सुझावों को मानते हुए DGT ने ट्रेनिंग के घंटों में भी बदलाव किया है:
- सालाना ट्रेनिंग का समय 1600 घंटे से घटाकर 1200 घंटे किया गया है।
- घटे हुए समय की भरपाई के लिए 150 घंटे की अनिवार्य प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OJT) जोड़ी गई है।
“सिर्फ सर्टिफिकेट नहीं, हुनर देना मकसद”: जयन्त चौधरी
इस महत्वपूर्ण सुधार पर कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयन्त चौधरी ने कहा:
”सिर्फ क्लासरूम लर्निंग काफी नहीं है। असली वर्कप्लेस एक्सपोजर से छात्रों में प्रैक्टिकल स्किल और कॉन्फिडेंस बढ़ता है। हमारा मकसद सिर्फ सर्टिफिकेट बांटना नहीं, बल्कि युवाओं को इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से ‘जॉब-रेडी’ बनाना है। यह ‘कुशल भारत – विकसित भारत’ के विजन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।”
कैसे काम करेगा नया सिस्टम? (मुख्य बिंदु)

छात्रों की सुविधा और सुरक्षा का ख्याल
सरकार ने छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई प्रावधान किए हैं:
बीमा: राज्य निदेशालय छात्रों के लिए आकस्मिक ग्रुप बीमा की व्यवस्था कर सकते हैं।
सुविधाएं: दूर-दराज के इलाकों में ट्रेनिंग करने वालों के लिए यात्रा और आवास की सुविधा दी जा सकती है।अपवाद: जो छात्र पहले से ही ‘ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग’ (DST) में हैं, उनके लिए ओजेटी की जगह प्रोजेक्ट वर्क अनिवार्य होगा क्योंकि वे पहले से ही इंडस्ट्री का अनुभव ले रहे हैं।
1950 में शुरू हुई क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम (CTS) अब आधुनिक युग के साथ तालमेल बिठा रही है। डीजीटी ने सभी राज्यों के कौशल विकास विभागों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द उपयुक्त उद्योगों की पहचान करें ताकि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण ट्रेनिंग मिल सके। इस पहल से न केवल युवाओं की एम्प्लॉयबिलिटी बढ़ेगी, बल्कि उद्योगों को भी तैयार और कुशल वर्कफोर्स मिलेगी।





