लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय में विकल्प सोसाइटी द्वारा आयोजित सनातन एवं भारतीय संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और उसके भविष्य पर केंद्रित एक भव्य राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस समारोह में विज्ञान, शिक्षा और संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। इसी क्रम में पीएसआईटी कानपुर के समूह निदेशक डॉ. मनमोहन शुक्ला को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय शोध कार्य, प्रकाशित शोध–पत्रों के लिए “अस्तित्व सम्मान 2025” से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान मुख्य अतिथि के रूप में निरंजन अखाड़े के पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज द्वारा प्रदान किया गया। स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति केवल पूजा–पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि विज्ञान, गणित, दर्शन और नवाचार की मूल धारा का केंद्र रही है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जो समाज अपनी जड़ों और अपने ज्ञान–परंपरा को समझता है, वही दुनिया को नेतृत्व देने की क्षमता रखता है। ऐसे आयोजन युवाओं को सनातन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच संतुलन समझने की प्रेरणा देते हैं।

विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख श्री स्वांत रंजन जी और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री (संगठन) श्री धर्मपाल सिंह जी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का मार्ग केवल तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि चरित्र, संस्कृति और मानवीय मूल्यों से होकर गुज़रता है। भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान आज योग, आयुर्वेद, AI–आधारित शोध और वैज्ञानिक परंपराओं के माध्यम से और मजबूत हो रही है।
कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, विज्ञान और अध्यात्म की वैश्विक भूमिका को समझना तथा भारतीय ज्ञान–परंपरा और आधुनिक विज्ञान के सम्मिलन पर विस्तृत विमर्श करना था। विशेष रूप से युवा छात्रों और शोधकर्ताओं को यह समझाना कि सनातन संस्कृति वैज्ञानिक चिंतन का प्राचीन और सबसे मजबूत आधार है।
इस प्रतिष्ठित सम्मान के अवसर पर डॉ. मनमोहन शुक्ला ने अपने विचार साझा किए कि भारत की वैज्ञानिक चेतना हमेशा से अद्वितीय रही है—चाहे वह गणित हो, भौतिकी, अंतरिक्ष विज्ञान या स्वास्थ्य विज्ञान। उन्होंने बताया कि उनके शोध का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक उपलब्धियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज में वास्तविक परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि भारत के प्राचीन ग्रंथों में जितना वैज्ञानिक ज्ञान है, यदि उस पर और अधिक शोध किया जाए, तो भारत पुनः विश्व–गुरु बन सकता है।

डॉ. शुक्ला ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में AI, रोबोटिक्स, कंप्यूटर विज्ञान और अनुसंधान पद्धतियों में भारतीय योगदान लगातार बढ़ रहा है। संस्कृत भाषा, वेदों और वैदिक गणित की वैज्ञानिक संरचना आज आधुनिक विज्ञान के लिए नए आयाम खोल रही है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक विज्ञान में नई दिशा देने का संकल्प लें।
लखनऊ विश्वविद्यालय में विकल्प सोसाइटी द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि भारत अपने प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से विश्व का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को सम्मानित किया गया और भारतीय संस्कृति के उत्थान का संकल्प दोहराया गया।






