पीएसआईटी टेकएक्सपो में छात्रों ने दिखाई भविष्य की तकनीक

शुक्रवार को पीएसआईटी में शुरू हुए टेक फेस्ट टेकएक्सपो में छात्रों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। आधुनिक तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ स्टार्टअप के नए-नए आइडियाज़ भी देखने को मिले, टेकएक्सपो का उद्घाटन पीएसआईटी के ग्रुप डायरेक्टर प्रो. डॉ. मनमोहन शुक्ला और आईआईटी कानपुर से प्रो. डॉ. कांतेश बलानी के द्वारा किया गया। उद्घाटन के दौरान दोनों विशिष्ट अतिथियों ने छात्रों के नवाचारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवा प्रतिभाओं को नई दिशा देने का काम करते हैं।
रक्षा तकनीक, साइबर सिक्योरिटी, एग्रीटेक, डीप टेक, एआई और एजुकेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में छात्रों ने ऐसे इनोवेशन पेश किए जिन्हें देखकर साफ महसूस होता है कि नई पीढ़ी न सिर्फ देश की जरूरतों को समझ रही है, बल्कि उनके समाधान भी अपनी सोच और तकनीक से खुद विकसित कर रही है।

इन्हीं प्रोजेक्ट्स में AcciSense ने लोगों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। यह एक IoT आधारित ऑटोमेटिक एक्सीडेंट अलर्ट सिस्टम है जो “गोल्डन आवर” में तुरंत मदद पहुंचाने के लिए बनाया गया है। इस डिवाइस की खास बात यह है कि यह सामान्य समय में बिल्कुल साइलेंट और अनट्रैक्ड रहता है यानी आपकी गाड़ी को कभी ट्रैक नहीं करता।
लेकिन जैसे ही गाड़ी में तेज टक्कर होती है, यह सिस्टम अपने हाई-इंटेंसिटी वाइब्रेशन सेंसर या एयरबैग कंट्रोल यूनिट के ट्रिगर से तुरंत एक्टिव हो जाता है। इसके बाद यह तेजी से GPS मॉड्यूल से आपकी सही लोकेशन निकालता है, साथ ही आग लगने या धुआं होने जैसी दूसरी खतरनाक स्थितियों को भी सेंसर से चेक करता है।
सिर्फ कुछ सेकंड में यह सिस्टम आपकी लोकेशन, टाइम, व्हीकल आईडी और खतरे की स्थिति (जैसे “फायर डिटेक्टेड”) को जोड़कर एक पूरा डेटा पैकेट तैयार करता है और इसे पुलिस, हॉस्पिटल, फायर ब्रिगेड और आपके परिवार वालों तक सीधे भेज देता है। साथ ही डिवाइस में लगा तेज बजर और फ्लैशिंग लाइट्स आसपास मौजूद लोगों को भी सावधान कर देती हैं।

AcciSense में NodeMCU ESP8266 माइक्रोकंट्रोलर, NEO-6M GPS, फ्लेम सेंसर, MQ-2 स्मोक सेंसर, बजर और लो-पावर मोड जैसी तकनीकें लगाई गई हैं जो इसे बेहद किफायती, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाती हैं। छात्र टीम का लक्ष्य इसे आगे चलकर एक स्टार्टअप के तौर पर बड़े पैमाने पर वाहनों में लगाने लायक डिवाइस बनाना है।
AcciSense प्रोजेक्ट पीएसआईटी के छात्रों की टीम द्वारा बनाया गया है, जिसका नेतृत्व रमनेश कुमार साहू ने किया, और इस टीम में रितेश सिंह तथा रजनी तिवारी सक्रिय रूप से शामिल रहे।

वही Zerythron VectorX ड्रोन ने भी काफी सराहना बटोरी। यह एक हाई-टेक ऑटोनॉमस मिलिटरी ड्रोन है जिसमें निगरानी, इंटरसेप्शन और अटैक जैसी तीनों क्षमताएँ मौजूद हैं।
Zerythron VectorX अपने AI आधारित सिस्टम से दुश्मन की तरफ से आने वाले खतरे जैसे मिसाइल या दुश्मन ड्रोन को पहचान सकता है। जैसे ही खतरे का पता चलता है, यह अपने अंदर फिट छोटा इंटरसेप्टर ड्रोन खुद-ब-खुद रिलीज कर देता है जो हवा में ही उस मिसाइल को रोक देता है।
ड्रोन में मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग, रियल-टाइम वीडियो फीड, एंटी-जैमिंग सिस्टम और लंबी दूरी का कंट्रोल सिस्टम शामिल है, जिससे सिर्फ एक ऑपरेटर तीन से ज्यादा टारगेट्स को एक-एक कर अटैक कर सकता है। यह पूरी तरह भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।यह प्रोजेक्ट मो रयान यूनुस के नेतृत्व में तैयार किया गया, जिसमें कर्णिका शर्मा, हर्ष बाजपेई, हनी द्विवेदी, मिथिलेश साहनी और नवीन शर्मा शामिल रहे।

टेकएक्सपो में छात्रों ने ऐसे कई प्रोजेक्ट्स पेश किए जो सीधे स्मार्ट–सिटी और पब्लिक यूटिलिटी की समस्याओं को हल करने पर केंद्रित थे। इनमें एक रियल–टाइम ड्रेनेज मॉनिटरिंग सिस्टम भी शामिल था, जिसे शहरों और हाउसिंग सोसायटी में पानी के बहाव की निगरानी को आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह सिस्टम पाइपलाइन के अंदर पानी के प्रवाह को लगातार ट्रैक करता है और उसके आधार पर यह पहचान लेता है कि किस जगह पर पानी रुक रहा है, फ्लो असामान्य है या जाम बनने की स्थिति पैदा हो रही है।
इस तकनीक में मौसम संबंधी जानकारी को भी शामिल किया गया है, जिससे भारी बारिश या संभावित जलभराव जैसी स्थितियों का पहले से पता लगाया जा सकता है। इसका लाइव डेटा और पूरा इतिहास एक वेब डैशबोर्ड पर दिखाई देता है, जिससे नगर निगम, मेंटेनेंस टीमें और सोसायटी प्रबंधन बिना मैन्युअल निरीक्षण के तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं।
यह सिस्टम स्मार्ट–सिटी ड्रेनेज नेटवर्क, नगर निगमों, हाउसिंग सोसायटी, इंडस्ट्रियल एरिया और बड़े कैंपस मैनेजमेंट के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व आराध्य बाजपेई ने किया, जबकि टीम में अनुराग यादव, अरिशा सिंह, अर्हान खान, अर्जित सिंह और अरपित कुमार शामिल रहे।

इसी तरह VoxLens भी टेकएक्सपो का एक बेहद प्रभावशाली प्रोजेक्ट रहा। यह खासतौर पर उन लोगों की मदद करता है जो साइन लैंग्वेज का इस्तेमाल करते हैं, ताकि वे आसानी से उन लोगों से भी बातचीत कर सकें जिन्हें साइन लैंग्वेज नहीं आती। VoxLens किसी भी बातचीत को तुरंत टेक्स्ट में बदल देता है और लंबी बातों को छोटा सार भी बना सकता है, जिससे उपयोगकर्ता को हर जानकारी तेज और साफ रूप में दिखाई देती है।
इसमें लगा डुअल–कैमरा मॉड्यूल कई स्पीकर्स को पहचान लेता है, और चश्मे में मौजूद प्रिज़्म की मदद से आसपास की रियल–टाइम वीडियो सीधे लेंस पर दिखाई देती रहती है, जो इसे और अधिक स्मार्ट और उपयोगी बनाती है। साथ ही यह यूज़र के आसपास मौजूद बाधाओं को भी पहचानकर सतर्क कर सकता है, जिससे यह दृष्टिबाधित और विशेष आवश्यकता वाले लोगों के लिए भी काफी सहायक हो सकता है।

टेकएक्सपो में छात्रों का एक और इनोवेशन जिसने सबका ध्यान खींचा, वह था Darshan360, जिसे भारत का पहला AI आधारित टूरिज़्म इंटेलिजेंस सिस्टम कहा जा रहा है। यह प्रोजेक्ट पीएसआईटी के छात्रों निशांत दीक्षित, निखिल बंसल, मृदुल त्रिपाठी, निशांत मिश्रा, आयुष गौतम और मयंक सोनी की टीम ने मिलकर विकसित किया है। इसका उद्देश्य भारत के पर्यटन क्षेत्र को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर यात्राओं को ज्यादा सुरक्षित, सरल और स्मार्ट बनाना है।

Darshan360 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह यात्रियों, स्थानीय समुदायों और पर्यटन विभागों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ सके। यह सिस्टम यात्रियों को उनकी पसंद, बजट और मौसम के आधार पर व्यक्तिगत यात्रा योजना (इटिनरेरी) देता है। साथ ही यह संभावित जोखिम, भीड़, मौसम, स्थानीय संस्कृति और सुरक्षा अलर्ट जैसी जानकारी भी पहले से उपलब्ध करा देता है, जिससे कोई भी व्यक्ति बेहतर तरीके से अपनी यात्रा की योजना बना सकता है।

यही नहीं, Darshan360 अधिकारियों और पर्यटन विभागों के लिए भी एक उपयोगी टूल है। यह स्वतः रिपोर्ट तैयार करता है, डेटा का विश्लेषण देता है और ऐसी अंतर्दृष्टियाँ उपलब्ध कराता है जो नीति निर्माण और पर्यटन प्रबंधन में काफी मददगार साबित हो सकती हैं।
भारत में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं जिन्हें पर्याप्त पहचान नहीं मिल पाती या यात्रियों तक सही जानकारी नहीं पहुंचती। Darshan360 इन सभी चुनौतियों को एक ही केंद्रीकृत और इंटेलिजेंट सिस्टम के ज़रिए दूर करने की कोशिश करता है, ताकि यात्राओं को सुरक्षित, संगठित और अनुभव-समृद्ध बनाया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान आईआईटी कानपुर से राकेश रोशन और अनीमेश मिश्रा भी मौजूद रहे। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और छात्रों द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट्स को बारीकी से समझा। दोनों विशेषज्ञों ने छात्रों की सोच, तकनीकी समझ और नवाचार की भावना की सराहना की तथा उन्हें भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

दिनभर चले इस टेकएक्सपो में और भी कई इनोवेशन दिखाए गए, जैसे स्मार्ट एग्रीकल्चर सेंसर सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी के एडवांस टूल्स, डीप टेक मॉडल और एआई आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म , जो बताते हैं कि पीएसआईटी के छात्र भविष्य की टेक्नोलॉजी को सिर्फ समझ ही नहीं रहे, बल्कि खुद बनाकर दिखा भी रहे हैं।
कार्यक्रम में पीएसआईटी के डायरेक्टर प्रो. डॉ. राघवेंद्र सिंह, प्रो. डॉ. विशाल नगर, प्रो. डॉ. रघुराज सिंह सूर्यवंशी, डॉ. सुमित चंद्रा और डॉ. आरती सक्सेना भी मौजूद रहे।

पीएसआईटी के चेयरमैन श्री प्रणवीर सिंह जी ने कहा कि छात्रों की नवाचार के प्रति गहरी रुचि देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है। उन्होंने बताया कि हमारे विद्यार्थियों द्वारा तैयार की जा रही तकनीक आज सिर्फ सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा, अंतरिक्ष और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोगी योगदान दे रही है और भविष्य में देश की प्रगति को नई दिशा देगी।

पीएसआईटी के ग्रुप डायरेक्टर प्रो. डॉ. मनमोहन शुक्ला ने कहा कि टेकएक्सपो में छात्रों ने जिस स्तर के प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए हैं, वह यह साबित करता है कि पीएसआईटी रिसर्च और इनोवेशन का एक मजबूत केंद्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि संस्थान हमेशा युवाओं को नई तकनीक बनाने, प्रयोग करने और उसे वास्तविक समस्याओं के समाधान में बदलने के लिए प्रेरित और सहयोग करता रहेगा।

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